छत्तीसगढ़ में इन दिनों सत्ता के गलियारों से लेकर सरकारी परिसरों तक एक ऐसा तमाशा चल रहा है, जिसने “सुशासन” के दावों पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। एक ओर किसान आत्महत्या की कगार पर हैं, युवा रोजगार के लिए भटक रहे हैं, वहीं दूसरी ओर सरकारी रेस्ट हाउस ‘रंगीन महफिल’ में तब्दील होते नजर आ रहे हैं। इस पूरे मामले पर प्रदेश के वरिष्ठ कृषि मंत्री रामविचार नेताम का बयान अब आग में घी डालने का काम कर रहा है।सूरजपुर के सरकारी रेस्ट हाउस में हुए कथित अश्लील डांस के वीडियो सामने आने के बाद जब मीडिया ने मंत्री रामविचार नेताम से सवाल पूछे, तो जिम्मेदारी निभाने के बजाय मंत्री जी ने मामले को मजाक और तंज में उड़ा दिया। मंत्री का यह कहना कि “कला तो कला है… अगर रेस्ट हाउस में भी कला जागृत हो जा रही है तो क्या कहेंगे?” न केवल सरकारी गरिमा का मजाक उड़ाता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि सत्ता में बैठे लोग नैतिकता और जवाबदेही को कितनी हल्के में लेते हैं।यहीं नहीं, मंत्री जी ने पत्रकारों पर ही तंज कसते हुए कहा— “वहां आपको कौन जाने बोला था? आपने देखा है… मैं भी वीडियो देखकर बताता हूं।” यह बयान किसी सड़कछाप नेता का नहीं, बल्कि प्रदेश के कृषि मंत्री का है। सवाल यह है कि क्या अब छत्तीसगढ़ में सरकारी संपत्तियों का दुरुपयोग भी “कला” के नाम पर जायज ठहराया जाएगा?बताया जा रहा है कि सूरजपुर जिले के रामानुजनगर ब्लॉक स्थित फॉरेस्ट रेस्ट हाउस में रात भर डांस, शराब और नोटों की बारिश होती रही। सरकारी परिसर, जो अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के ठहरने के लिए बनाए जाते हैं, वहां इस तरह की गतिविधियां होना प्रशासनिक तंत्र की नाकामी और राजनीतिक संरक्षण की ओर इशारा करता है। चौंकाने वाली बात यह है कि इस कथित आयोजन में स्थानीय जनप्रतिनिधियों और कुछ सरकारी कर्मचारियों की मौजूदगी की भी चर्चा है, और एक जनपद सदस्य पर पूरे कार्यक्रम के इंतजाम का आरोप लगाया जा रहा है।सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब ऐसे मामले सामने आते हैं, तो सरकार के वरिष्ठ मंत्री का काम जांच के आदेश देना होता है या फिर हंसकर उसे ‘कला’ बताकर टाल देना? क्या यही छत्तीसगढ़ की राजनीतिक संस्कृति रह गई है कि सरकारी रेस्ट हाउसों में अश्लीलता परोस दी जाए और सवाल उठाने वालों को ही कटघरे में खड़ा कर दिया जाए?मंत्री रामविचार नेताम का यह बयान अब केवल एक बयान नहीं रहा, बल्कि यह सत्ता के उस चेहरे को उजागर करता है, जो जनता की समस्याओं से कटा हुआ नजर आता है। किसान संकट, बेरोजगारी और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दों पर चुप्पी, लेकिन अश्लीलता पर मजाक—यही आज की सियासत का कड़वा सच बनता जा रहा है।अब देखने वाली बात यह होगी कि सरकार इस पूरे मामले को गंभीरता से लेकर कार्रवाई करती है या फिर इसे भी “कला” कहकर फाइलों में दफना दिया जाएगा। जनता जवाब चाहती है, तंज नहीं।
चेट्रीचंड पर पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल की शुभकामनाएं, बोले—भगवान झूलेलाल की कृपा से जीवन में आए सुख-समृद्धि
कोरबा। जयसिंह अग्रवाल ने वरूण अवतार भगवान झूलेलाल जयंती एवं चेट्रीचंड के पावन अवसर पर कोरबावासियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं।अपने शुभकामना संदेश में श्री अग्रवाल ने कहा…










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