Amarjeet Bhagat : छत्तीसगढ़ राज्यसभा टिकट के लिए कांग्रेस में घमासान, दिल्ली दरबार पहुंचे अमरजीत भगत

रायपुर। छत्तीसगढ़ में राज्यसभा की खाली हो रही सीटों के लिए नामांकन की प्रक्रिया शुरू होते ही कांग्रेस के भीतर लॉबिंग तेज हो गई है। पूर्व मंत्री और कद्दावर आदिवासी नेता अमरजीत भगत ने दिल्ली पहुंचकर हाईकमान के सामने अपनी दावेदारी पेश की है। उन्होंने स्पष्ट रूप से मांग की है कि राज्यसभा उम्मीदवार के चयन में ‘क्षेत्रीय संतुलन’ और ‘स्थानीय प्रतिनिधित्व’ को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

“बाहरी नहीं, स्थानीय को मिले मौका”

अमरजीत भगत ने हाईकमान से मुलाकात के दौरान इस बात पर जोर दिया कि पार्टी को छत्तीसगढ़ के सभी संभागों के प्रतिनिधित्व का ख्याल रखना चाहिए। उनका इशारा पिछले कुछ वर्षों में राज्य के बाहर के नेताओं को छत्तीसगढ़ कोटे से राज्यसभा भेजने की परंपरा की ओर था।

अमरजीत भगत का मुख्य तर्क: “पार्टी को राज्यसभा के लिए उम्मीदवार तय करते समय सरगुजा, बस्तर और मध्य छत्तीसगढ़ के समीकरणों को समझना होगा। स्थानीय कार्यकर्ताओं और नेताओं को मौका देने से आगामी चुनावों में पार्टी को मजबूती मिलेगी।”

इन सीटों पर होनी है जंग

छत्तीसगढ़ में के.टी.एस. तुलसी और फूलो देवी नेताम का कार्यकाल अप्रैल 2026 में समाप्त हो रहा है। निर्वाचन आयोग के कार्यक्रम के अनुसार:

नामांकन की आखिरी तारीख: 5 मार्च 2026

मतदान की तारीख: 16 मार्च 2026

सीटों का गणित: वर्तमान विधानसभा में बहुमत के आधार पर एक सीट भाजपा के खाते में जाना तय है, जबकि दूसरी सीट पर कांग्रेस अपनी दावेदारी मजबूत करना चाहती है।

दावेदारों की लंबी फेहरिस्त

अमरजीत भगत के अलावा कांग्रेस के भीतर कई अन्य बड़े नाम भी दौड़ में शामिल बताए जा रहे हैं:

फूलो देवी नेताम: पार्टी उन्हें दोबारा मौका देने पर विचार कर सकती है।

टी.एस. सिंहदेव: पूर्व डिप्टी सीएम का नाम भी चर्चाओं में सबसे ऊपर है।

दीपक बैज: पीसीसी चीफ और बस्तर के बड़े चेहरे के रूप में उनकी दावेदारी भी मजबूत मानी जा रही है।

ताम्रध्वज साहू और मोहन मरकाम: ये पूर्व मंत्री भी टिकट की रेस में सक्रिय हैं।

हाईकमान के लिए कठिन परीक्षा

विधानसभा चुनाव 2023 में हार के बाद कांग्रेस के लिए यह राज्यसभा चुनाव बेहद अहम है। पार्टी एक तरफ ‘फायरपावर’ (संसद में मजबूत वक्ता) की तलाश में है, तो दूसरी तरफ उसे जातिगत और क्षेत्रीय समीकरणों को भी साधना है। सूत्रों का कहना है कि मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी अंतिम फैसला लेने से पहले राज्य के वरिष्ठ नेताओं से फीडबैक ले रहे हैं।

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