
तिल्दा/ नेवरा/ स्व.राजेश कश्यप की स्मृति में फुटबाल क्लब बहेसर द्वारा तीन दिवसीय 9 A फुटबाल टूर्नामेंट का आयोजन शासकीय हाई स्कूल बहेसर में किया गया था । जिसका समापन बलौदाबाजार विधायक प्रमोद शर्मा चैतन्य आइल प्लांट के एम डी जीतेन्द्र अग्रवाल बलौदाबाजार के जनपद उपाध्यक्ष, थाना प्रभारी शरद चंद्रा ग्राम पंचायत बहेसर की सरपंच श्रीमती किरण सोहन वर्मा, टी निगराज रेड्डी पूर्व अंतर्राष्ट्रीय खिलाडी के गरिमामयी उपस्थिति में सम्पन्न हुआ, सर्व प्रथम अतिथियों का पुष्प गुच्छ और गुलदस्ता भेंट कर स्वागत किया गया तीन दिनों तक चले इस फुटबाल प्रतियोगिता में 16 टीमों ने भाग लिया था फाइनल मैच बी ऍम वाई चरौदा ने जीता रनरअप स्टारलाइन कसडोल की टीम रही मैन ऑफ़ द सीरीज नोमिश साहू तथा बेस्ट गोलकीपर बी ऍम वाई चरौदा रहा प्रतिभागियो को प्रथम पुरुस्कार 21000 रूपये आयोजक समिति के द्वारा दूसरा पुरुष्कार 10001 रुपए चैतन्य आइल प्लांट तिल्दा द्वारा दिया गया बलौदाबाजार विधायक प्रमोद शर्मा ने बच्चो को कहा की तुम जैसे बच्चों को एक्सरसाइज करना सबसे बोरिंग काम लगता है ना। सारा दिन टीवी, कंप्यूटर देखते रहना ही पसंद है, जिससे तुम मोटापे का शिकार होते हो। लेकिन जो बच्चे फुटबॉल खेलते हैं उनके लिए तो यह खेल ही एक्सरसाइज करने के बराबर हो जाता है। फुटबॉल खेलने में शरीर को काफी मेहनत करनी होती है। जब तुम भागते हो, बॉल पर नजर बनाए रखते हो, तो इससे तुम्हारा स्टेमिना, ताकत, लम्बाई, संतुलन, सहनशीलता आदि चीजें शरीर में पैदा होती हैं। फुटबॉल खेलने में दिमाग का काम भी होता है, जिससे तुम दिमागी बीमारियों जैसे हाइपरटेंशन, डिप्रेशन से बच सकते हो। फुटबॉल से एकाग्रता बढ़ती है, क्विकनेस बढ़ती है, जिससे दिमाग स्वस्थ रहता है।पंचायत बहेसर की सरपंच श्रीमती किरण सोहन वर्मा ने कहा की फुटबॉल में आमतौर पर लात मारने, कूदने, शरीर को घुमाने और मोड़ने की क्रियाएं की जाती हैं। इससे शरीर की मांसपेशियां मजबूत होती हैं। गोल बनाने, बचाने, विरोधियों को पकड़ने, फेंकने आदि में भी मांसपेशियों का भरपूर इस्तेमाल होता है। इससे शरीर मजबूत होता है और मांसपेशियों की ताकत भी बढ़ती है।आम तौर पर देखा जाता है कि वृद़धावस्था में हड्डियों का घनत्व कम हो जाता है। एक फुटबॉल मैच के दौरान शरीर पर बार-बार वजन डालने वाले व्यायाम हड्डी की ताकत बढ़ाने के लिए बेहतर व्यायाम है। फुटबॉल खेलने वाले लोगों की फिटनेस ताउम्र बरकरार रहती है। चैतन्य आइल प्लांट के एम डी जीतेन्द्र अग्रवाल ने कहा की शारीरिक शक्ति बढ़ने और टीम वर्क के साथ ही फुटबॉल खेलने से खिलाडि़यों में आत्मविश्वास की भी भावना बढ़ती है। फुटबॉल चाहें स्कूल में खेला जाए, सोसायटी में या फिर बड़े मैदानों में, आपके प्रदर्शन पर जब दर्शक आपको सराहते हैं तो निश्चित ही आत्मविश्वास बढ़ता ही है। इससे चिंता और अवसाद जैसी मानसिक बीमारियों से भी बचने में मदद मिलती है।
अन्य खेलों की ही तरह फुटबॉल की भी खासियत यह है कि इसे किसी भी उम्र के लोग खेल सकते हैं। बच्चों से लेकर बड़ों तक। अब तो सीनियर सिटीजन्स ने भी फुटबॉल खेलने के लिए अपने अलग क्लब बना लिए हैं। तो हो जाएं शुरु अपनी फुटबॉल के साथ, कई शारीरिक और मानसिक लाभ लेने के लिए। थाना प्रभारी शरद चंद्रा ने कहा की फुटबॉल खेलने के दौरान किक, टि्वस्ट, टर्न और स्प्रिंट जैसे मूवमेंट की वजह से पूरे शरीर का वर्कआउट होता है। इसे खेलने से एरोबिक कैपेसिटी बढ़ती है। बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए ये खेल बेहद फायदेमंद है ।
पुरुष्कार वितरण समापन के पश्चात अतिथियों द्वारा स्कूल प्रांगण में पौधा रोपण किया गया ।







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