
फिल्म जगत के एक युग का हुआ अंत। प्रथम सुपरस्टार कहे जाने वाले ट्रेजडी किंग दिलीप कुमार (युसूफ अली खान) 98 वर्ष की आयु में आज हम सभी को अलविदा कह गए। ज्वार भाटा से सिने जगत में कदम रखने वाले दिलीप साहब ने अपने अभिनय का लोहा मनवाया था। दिलीप साहब अपने आप में एक एक्टिंग की पाठशाला थे । राम और श्याम, गंगा जमुना, क्रांति, अंदाज़, कर्मा ,गोपी, सौदागर, देवदास, कोहिनूर, आन, मुग़ल ए आज़म आदि 50 साल के फिल्मी करियर में कुल 60 के आसपास फिल्में कीं उन्होंने। एक किरदार को निभाने के लिए कई-कई साल तक उस किरदार को खुद में ढालने की कोशिश करते थे। उन्होंने ठेठ देहाती गोपी से लेकर बेहतरीन उर्दू के सलीम और देवदास तक, हर भाषा, धर्म, वर्ग के युवाओं का प्रतिनिधित्व किया, जो काबिले तारीफ है। दिलीप कुमार साहब जो राज्यसभा अध्यक्ष भी रहे उन्हें पद्म विभूषण, लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड, दादा साहब फाल्के अवार्ड, यहां तक कि पाकिस्तान का सर्वोच्च नागरिक सम्मान निशान ए इम्तियाज इं से भी नवाजा गया था।
अदाकारी के साथ-साथ बहुत ही अच्छे गायक, खाने के शौकीन तथा तमाम सूप और रेसिपीज का ईजाद करने वाले दिलीप साहब बहुत अच्छा सितार भी बजाते थे।
सलीम तथा देवदास का किरदार निभाने वाले दिलीप कुमार ने अपनी जाति जिन्दगी में भी प्रेम को बखूबी निभाया। सायरा बानो दिलीप कुमार का अटूट प्रेम अपने आप में बेमिसाल है।
यूं तो उन्होंने अपनी पूरी जिंदगी जी लेकिन कहा जाता है कि जो हमारे दिल के करीब होता है उसका किसी उम्र में जाना दुखी कर जाता है 98 वर्ष की उम्र में उनका जाना अगर सा रहा है काश! वो दो वर्ष और जीते तो शतायु कहलाते । तमाम अभिनेताओं के फिल्म जगत में आने की वजह या यूं कहें तो प्रेरणास्रोत रहे दिलीप कुमार। अमिताभ बच्चन, शाहरुख खान, सायरा बानो, हेमा मालिनी, धर्मेंद्र आदि, सभी ने उनका जिक्र करते हुए कहा है कि उनके जैसा ना कोई था ना होगा। यदि फिल्म जगत का इतिहास लिखा जाएगा तो दिलीप साहब का नाम शीर्ष पर आएगा।
12 बरस की उम्र में दिलीप साहब की सादगी, संजीदगी की फैन उनसे निकाह का सपना संजोने वाली सायरा बानो का आज अपने देवदास से बिछड़ जाना, बेहद गमगीन करने वाली खबर है। ताउम्र सुख दुख में एक दूजे का साथ देने वाला एक प्रेमी युगल आज बिछड़ गया और तन्हा रह गई साहब की सायरा। खबर बहुत दुखद है लेकिन परवरदिगार से यही दुआ करती हूं कि उन्हें जन्नत बख्शे और सायरा बानो जी को इस दुख को सहने की ताकत दे।
डॉ. ममता श्रीवास्तवा(सरूनाथ)







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