
तिल्दा नेवरा से निखिल वाधवा की रिपोर्ट-
तिल्दा /नेवरा/ पूरा देश कोरोना की भयावता से जूझ रहा है लोगों में भय का माहौल है और लगातार मरीजों की संख्या में इजाफा हो रहा है। आज तिल्दा नगर के खुशी अस्पताल के हाल देखे तो वहां पर भी स्टॉफ बिना मॉस्क लगाए काम कर रहे थे तो सोशल डिस्टेंसिंग का तो कहीं भी पालन नहीं हो रहा था।
लोगों को कोरोना से बचाव के लिए हर स्तर पर जागरूक करने का प्रयास किया जा रहा है। पीएम, सीएम् से लेकर राज्य सरकार एवं जिला प्रशाासन के आला अधिकारी मॉस्क लगाने एवं सोशल डिस्टेंसिंग के नियम का पालन करने की अपील कर रहे हैं। यह बात अलग है आज जब खुशी अस्पताल के हाल देखे तो वहां पर भी गाइड लाइन की धज्जियां उड़ाई जाने के दृश्य नजर आए। स्टॉफ से लेकर चिकित्सक गाइड लाइन का पालन नहीं कर रहे थे।
आज कचरा किसी भी रूप में हो, वह देश और दुनिया के लिये एक बहुत बड़ा पर्यावरणीय संकट बनता जा रहा है। हम जानते हैं कि हर शहर में कई निजी व सरकारी अस्पताल होते हैं, जिनसे प्रतिदिन सैकड़ों टन चिकित्सकीय कचरा निकलता है और यदि पूरे देश में इनकी संख्या की बात करें तो देश भर के अस्पतालों से निकलने वाला कचरा कई हजार टनों में होता है।
इस भागम-भाग की जिंदगी में बीमारियाँ बढ़ती जा रही हैं, बीमारों की संख्या बढ़ रही है, अस्पतालों की संख्या भी बढ़ रही है और उसी हिसाब से खुशी हॉस्पिटल नेवरा मे बीमार व्यक्तियों के इलाज में प्रयुक्त होने वाले सामानों की संख्या बढ़ रही है, जिन्हें इस्तेमाल करके कचरे में फेंक दिया जाता है, जो एक बायोमेडिकल कचरे का रूप ले लेता है।
उपरोक्त के अलावा कुछ सामान्य पदार्थ भी होते हैं जिनमें दवाइयों के रैपर, कागज, रिर्पोट, एक्स-रे फिल्में और रसोई से निकलने वाला कूड़ा-कचरा आता है। यही नहीं, कुछ अन्य पदार्थ जैसे कि ग्लूकोज की बोतलें, सूइयाँ, दस्ताने आदि भी बायोमेडिकल कचरे में आते हैं। इन सब को खुशी हॉस्पिटल अपने पीछे पड़े भूभाग में फेंक रहे हैं
केंद्र सरकार ने पर्यावरण संरक्षण के लिये बायोमेडिकल वेस्ट (प्रबंधन व संचालन) नियम, 1998 बनाया है। बायोमेडिकल वेस्ट अधिनियम 1998 के अनुसार निजी व सरकारी अस्पतालों को इस तरह के चिकित्सीय जैविक कचरे को खुले में या सड़कों पर नहीं फेंकना चाहिए। ना ही इस कचरे को म्यूनीसिपल कचरे में मिलाना चाहिए। साथ ही स्थानीय कूड़ाघरों में भी नहीं डालना चाहिए ।
जब स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े लोग इस प्रकार की लापरवाही करेंगे तो फिर आम जनता से नियम पालन की उम्मीद करना बेमानी होगा।







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