
विश्व पर्यावरण दिवस पर जहां समान्य नागरिक अपने सीमित संसाधनों से पर्यावरण संरक्षण की दिशा मे अपने छोटे छोटे प्रयासों से कोशिश कर रहे हैं वहीं दूसरी ओर सरकारी और प्रशासनिक अधिकारियों की उपेक्षा विचारणीय है।
वाराणसी मे गंगा नदी मे लगी काई और लखनऊ मे गोमती नदी मे उगी जलकुम्भी इसकी गवाही दे रहे हैं।नदियों की सफाई और पर्यावरण संरक्षण के नाम पर हर वर्ष करोड़ों रुपयों का वारा न्यारा होता है पर सामान्य समस्याओं का ही निराकरण नहीं होता है।
ऐसा नहीं है कि यह केवल एक या दो जगहों की बात है। अधिकतर स्थानों पर यही स्थिति है। पर्यावरण संरक्षण, पौधे लगाना जैसे कार्य एक रस्म की तरह निभाए जा रहे हैं। अब भी समय है कि जिम्मेदार लोग अपने दायित्वों का उचित रूप से निर्वहन करें और पर्यावरण संरक्षण और संवर्धन मे योगदान दे।

राकेश श्रीवास्तव







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