भगवान बसे मन में विश्वास बस करें
जीवन सरल बने झोली में हर्ष भरेंं
कर्म करें कुछ ऐसे ना दर्द टिक सके
साहस न कभी डूबे धीरज ज़रा धरें
फूल बहारों में खिलें शीतल पवन चले
क्यों डाल बनें सूखी पत्ते सदा झरें
सच की नदिया में ही निरमल नीर बहे
धूप न सेकें झूठी जग से नहीं डरें
चैन मिलेगा निश्चित क्यों हो तरस रहे
मिलकर इक दूजे से दुख दर्द अब हरें
तृष्णाएं बस त्यागें मन निर्मल रखें सदा
शान्त समाधी में हो चित ध्यान ही धरें
केटी दादलाणी
