पूर्व प्रधानमंत्री चरण सिंह के पुत्र और पूर्व केंद्रीय मंत्री अजीत सिंह को भी कोरोना ने अपना ग्रास बना लिया .अजीत सिंह का जाना प्रतिदिन होने वाली हजारों मौतों में से एक होते हुए भी तनिक हटकर है. मुझे अजीत सिंह और उनके पिता चौधरी चरण सिंह से मिलने.बतियाने का अवसर मिला है इसलिए मै कह सकता हूँ की अजीत सिंह अपने पिता से एकदम अलग थे. अजीत सिंह वाक्पटु,हाजिर जबाब ,विनोदप्रिय और सहज नेता थे .सबसे बड़ी बात ये की वे एक राजनितिक विरासत के उत्तराधिकारी थे .राजनीति में उन्होंने जब तक बस चला तब तक दल बदले लेकिन उनका स्वभाव नहीं बदला .उनके तमाम सपने अधूरे रह गए,िनमने से एक सपना अलग दोआब राज्य बनाने का था .
अजीत सिंह ने ताउम्र अपने केश सफेद नहीं होने दिए ,लेकिन उनका दिल हमेशा साफ़ रहा .हाल के किसान आंदोलन में भी वे कुछ समय के लिए प्रकट हुए थे. राजनीति में अजीत सिंह जैसे पढ़े-लिखे नेताओं की उपस्थिति अच्छी लगती ही.एक दिन मै उनका एक बयान रिकार्ड कर रहा था.मेरे हाथ में आजतक के एआईडी के साथ है आधा दर्जन आईडी और भी थे लेकिन केवल सिर्फ मेरे आईडी में थी.इसे देखकर बोले -कितने बुरे दिन आ गए हैं मीडिया के,आईडी सात-आठ और केबिल मात्र एक ?मै मुस्करा दिया.भारतीय राजनीति में अजीत सिंह जैसे अनेक नेता हैं जो हर दल के लिए उपयोगी होते हैं लेकिन देश के लिए कौन,कितना उपयोगी होता है ये अलग बात है ? विनम्र श्रृद्धांजलि
-राकेश अचल








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