बसंत पर यौवन छाया पुष्पित हुआ पलाश
सोंधे सोंधे पवन संग मुदित हुआ आकाश
निर्मल शीतल प्रभात पर पग पग बहे सुगंध
हर सुमन पर भ्रमर जाये और पिये मकरन्द
मानव मन में किंशुक से उदित हुआ उल्लास
अमुवा की छांव में कोयल की मधुर तान
दिग दिगंत प्रेम फैलाये कामदेव के बाण
हरीतिमा संग पेड़ों में मुखरित हुआ सुवास
पलाश के पुष्पित सुमन ज्यों नारी सकुचाये
लज्जा की लाली गालों पर लिए शीश झुकाए
टेसू के इस प्रतीक से गर्वित हुआ उजास








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