
देश के चिरयुवा स्वामी विवेकानंद जी के जन्मदिवस पर सभी युवाओं को हार्दिक बधाई ।
युवा का अर्थ है जोश और उत्साह से भरपूर व्यक्ति। युवा कोई भी व्यक्ति उम्र से नहीं , बल्कि अपनी सोच से होता है, कई बार हम देखते हैं कि हमारे आसपास कुछ ऐसे बुजुर्ग होते हैं जिनकी जिंदादिली और स्फूर्ति देखकर नौजवान भी शरमा जाए।
आज हमारे देश को सिर्फ युवा (युवापीढ़ी) की नहीं बल्कि युवा सोच की आवश्यकता है। आज फिर जब समाज में चारों तरफ तनाव पूर्ण माहौल है खासकर हमारा युवा वर्ग बेरोजगारी नामक महामारी से जूझ रहा है तब स्वामी विवेकानंद को याद करने की अत्यंत आवश्यकता है। उनके दिखाए मार्ग पर चलने की आवश्यकता है और एक सुंदर सुदृढ़ भारत के निर्माण की आवश्यकता है । आवश्यकता है खुद की प्रतिभा को पहचानने और खुद का रोजगार उत्पन्न करने की ।
स्वामी विवेकानंद जी ने कहा था-” दिन में एक बार खुद से जरूर बात करो वरना आप दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण व्यक्ति से बात करने का मौका खो देंगे।” क्योंकि जब हम खुद से बात करते हैं आत्मसात करते हैं तब हमें पता चलता है कि हमारे अंदर कितनी प्रतिभा छिपी हुई है जिसे हम बाहर ढूंढने की कोशिश कर रहे थे वह अवलंबन असल में हमारे भीतर है जिसे स्वावलंबन कहा जाता है और जिस दिन सभी अपने आप को पहचान लेंगे समाज का स्वरूप ही बदल जाएगा। कहा जाता है कि व्यक्ति तन से नहीं बल्कि मन से बूढा पहले होता है इसलिए बडे ममत्व भरे आत्मीयता से कहती हूँ कि खुद को चिरयुवा बनाइए ,अपनी सोच में बदलाव लाइए और खुद को स्वामी विवेकानंद जी का वंशज मान खुद पर गर्व कीजिए। हर स्त्री-पुरुष को अपने चरित्र बल पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है । यकीन मानिए जिस दिन आप खुद की नजरों में उठ गए उस दिन के बाद आपको कोई नहीं गिरा सकता।
आज युवा दिवस के शुभ अवसर पर उन सभी लोगों को बधाई जो उम्र से नहीं बल्कि सोच से युवा हैं और समाज को बदलने की ताकत रखते हैं।
जय हिंद जय भारत।
डॉ ममता श्रीवास्तवा,सरूनाथ।







Comments are closed.