
ठीक 100 वर्ष पूर्व20-21 दिसंबर 1920 को मोहनदास करमचंद गांधी का छत्तीसगढ़ प्रवास हुआ था. गांधी रायपुर, धमतरी कंडेल गांव आए थे और जल सत्याग्रह का आगाज होना था. जिसकी जानकारी मिलते ही अंग्रेज अधिकारी घबरा कर लगाए गए टैक्स वापस ले लिए थे.
मैं आज इस संदर्भ में अपनी बात इन शब्दों और भावना के साथ आपके समक्ष रखना चाहता हूं कि महात्मा गांधी के छत्तीसगढ़ प्रवास के ऐतिहासिक 100 वर्ष के आज के महत्वपूर्ण दिवस पर हम यह समझे कि गांधी का प्रभाव छत्तीसगढ़ के जन-जन पर कितना अमिट है. महात्मा गांधी के दर्शन उनके सिद्धांतों का प्रभाव यहां के लोगों पर आज भी स्पष्ट दिखाई देता है. यहां की आवाम गांधी के सत्य अहिंसा और मुस्कुराहट से ऐसे बंध हुई हैं की कदम कदम पर बापू को याद करती हैं और उनके बताए रास्ते पर चलते जाती हैं.
हां, यह भी सच है कि कुछ लोग ऐसे हैं, जिन्हें “गांधी का रास्ता” पसंद नहीं है. और उन्हें सच बोलने, अहिंसा का रास्ता छोड़कर हथियार उठाने और अनेक सामाजिक बुराइयों में जीने की आदत सी पड़ गई है .मगर जब कभी भी शांत मन से बैठते हैं और बात होती है तो स्वीकार करते हैं कि यह रास्ता गलत है. वे मित्र इससे निकल भी नहीं पाते. ऐसे में मेरी विनम्र सलाह तो यही है कि जितनी जल्दी हो सके, एक दृढ़ संकल्प के साथ हम इसे तोड़ कर फेंक दे. और हम देखेंगे कि जब हम सत्य अर्थात कदम कदम पर सच बोलने का एक छोटा सा काम शुरू कर देंगे तो एक बदलाव होने लगेगा धीरे-धीरे हमें स्वयं ही महसूस होने लगेगा कि सच कितना मधु मीठा और हृदय ग्राही है. कितना हमें आनंद से विभोर कर देता है.
सच की यह ताकत हमें स्पष्ट दिखाई देती है और हम अपने आसपास बदलाव देखने लगते हैं उजाला देखने लगते हैं, रोशनी फैलने लगती है. लोग आपका सम्मान करने लगते हैं यह एक बहुत महत्वपूर्ण बदलाव सच के कारण आप देख सकते हैं.
गांधी का यह पहला मंत्र सत्य अर्थात सत्य की प्रतिष्ठा जीवन में सत्य को अंगीकार करना, जीवन में सच को कहना बहुत छोटी सी यह बात बहुत बड़ी बात है , मगर इसका आनंद आपको तभी मिलता है जब आप सच के रास्ते पर चलने लगते हैं तो मेरी आपसे विनम्र प्रार्थना है कि क्यों ना आज से हम यह संकल्प लें, कि मैं सच बोलूंगा. किसी भी स्थिति में मैं झूठ का दामन नहीं थामुंगा…. मैं झूठ नहीं कहूंगा. और इसके बाद आप स्वयं महसूस करेंगे कि आप के भीतर एक रोशनी उजाला प्रसारित हो रहा है और वह आनंद जिससे आप अभी तक महरूम हैं, जिसे हमें बापू ने दिखाया है. उसका स्वयं अपने परिवार, समाज और देश को लाभ मिलने की भूमिका तैयार हो जाएगी.
यहां आपको मैं इस कारण कराना चाहूंगा कि महात्मा गांधी ने सच की ताकत को बहुत ही महीन भाव से बारंबार अपने वक्तव्य और दर्शन में प्रस्तुत किया है और कुछ इस तरह पिरोया है कि उसे शुद्ध भाव से महसूस करने पर हमारा जीवन बदल जाता है जैसे हम बात करेंगे उनकी महत्वपूर्ण पुस्तक सत्य के प्रयोग की महात्मा गांधी की इस किताब में बारंबार यह बात आई है कि उन्होंने सच को महत्व दिया जैसे एक छोटी सी कहानी मैं बताऊं बापू जब छोटे थे मोहन उस समय स्कूल में उन्हें नकल करने का मौका शिक्षक दे दिया मगर मोहन ने उसे नकार दिया भाई ने सोना बेच दिया बापू अर्थात नन्हा मोहन नशा करने लगा गलत आदतों में पड़ गया मगर उसने पिता के समक्ष सब कुछ सत्य सत्य खोल कर रख दिया यह उनके जीवन का प्रारंभिक सच का प्रयोग है जो आगे चलकर आजीवन मंत्र बन गया और यह एक ऐसा मंत्र शक्ति की सारी दुनिया में आज भी महात्मा गांधी को स्मरण किया जा रहा है ऐसा कोई दिन नहीं होता जब गांधी को लेकर चर्चा ना हो . इसी तरह गांधी के बताए अहिंसा सत्याग्रह उपवास प्रार्थना नशा उन्मूलन खादी आदि सारे सिद्धांत अत्यंत महत्वपूर्ण है.
आज ऐसे महावीर महापुरुष के छत्तीसगढ़ आगमन की शताब्दी दिवस है आज इस मौके पर हम संकल्प लें कि हम महात्मा गांधी के सिद्धांतों का पालन करेंगे अगर हमने यह किया तो उसका अर्थ यह है कि हम सच्चे अर्थों में मनुष्य हैं गांधीवादी हैं.
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