आज हम बात करेंगे डेंगू की ।कोरोना की तरह गत वर्षों में डेंगू ने भी बहुत कहर बरपाया था ।आइए जानते हैं ये कैसे होता है ,इसका इलाज क्या है और इससे कैसे बचा जा सकता है ।
कोरोना की तरह डेंगू भी एक वायरस है ।ये मादा एडीज एजिप्टाई के काटने से होता है ।वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन के अनुसार लगभग 5 लाख लोग हर साल डेंगू के कारण अस्पतालों में भर्ती होते है ।
डेंगू वायरस एक फ्लेविवायरस है ।इसके चार प्रकार हैं…
DNEV-1
DNEV-2
DNEV-3
DNEV-4
डेंगू का इन्क्यूबेसन पीरियड सात दिन का होता है ।अर्थात् मच्छर के काटने के लगभग सात दिन बाद डेंगू के लक्षण परिलक्षित होते है ।
डेंगू के लक्षण….
१-तेज बुख़ार…बुख़ार १०३से१०४डिग्री तकजा सकता है यह सैडल बैग पैटर्न दिखाता है अर्थात् २४ घंटे में एक बार सही समय पर आता है ।
२-हाथ पैर एवं जोड़ों में दर्द ।
३-आँखों के पीछे दर्द ।
४-ग्रंथियों में सूजन आना ।
५-उल्टी होना ।
६-त्वचा पर चकत्ते आना ।
ये डेंगू के सामान्य लक्षण है ।लक्षणों के गंभीर होने पर डेंगू दो प्रकार की पिक्चर शो करता है …
१-डेंगू हेमरेजिक फ़ीचर …इसमें रक्तस्त्राव की समस्या होने लगती है ।जिससे खून की विशेषतः रक्त में पाए जाने वाले प्लेटलेट्स की कमी होने लगती हैं ।समय पर उपचार ना मिलने पर मृत्यु भी हो सकती है ।
२-डेंगू शॉक सिंड्रोम …प्लाज़्मा लीकिंग के कारण शरीर में पानी की अत्यधिक कमी हो जाती है जिससे ब्लड प्रेशर काफ़ी कम हो जाता है ।मरीज़ बेहोश भी हो सकता है ।
मच्छर के काटने से उसकी लार के साथ डेंगू वायरस शरीर में प्रवेश कर खून की श्वेत रक्त कणिकाओं के अंदर चला जाता है और वहाँ वायरस की संख्या में वृद्धि होने लगती है ।वायरस के विरोध में श्वेत रक्त कणिकाओं से साइटोंकाइनिन , इंटरफेरॉन आदि निकलते हैं जिससे बुख़ार व दर्द के लक्षण आते है ।वायरस की संख्या बढ़ने पर रक्त कणिकाओं की दीवारों से केपिलरी एक्शन के कारण द्रव बाहर निकलने लगता है ।इससे रक्त के प्रवाह में बाधा आती है ।रक्तचाप इतना कम हो जाता है कि श्शरीर के सभी अंगों को सही मात्रा में रक्त नहीं पहुँच पाता ।हड्डी में मज्जा के संक्रमित होने से प्लेटलेट्स की मात्रा कम होने लगती हैं।इससे रक्तस्राव की संभावना बढ जाती है ।
डॉयग्नोसिस …
डेंगू के लक्षण अन्य वायरल बुखार जैसे फ्लु ,येलो फीवर ,हिपेटाईटिस आदि से मिलते जुलते हैं । डेंगू के मुख्य लक्षण जिनसे इसे पहचाना जा सकता है…..
१-लगातार बढ़ता पेट दर्द
२-लगातार उल्टियां
३-म्युकोजल रक्तस्राव
४-लीवर का बड़ा होना
५-रक्त परीक्षण में प्लेटलेट्स का कम होना ६-एलिसा टेस्ट में NS-1AG का होना
उपचार ….
डेंगू का कोई स्पेसिफिक उपचार नहीं है सामान्यतः यह पाँच छह दिन में स्वत: ही ठीक हो जाती है ।
लक्षणों के आधार पर बुख़ार व दर्द के लिए सामान्य दर्द निवारक औषधीय दी जाती है ।
अधिक मात्रा में तरल पदार्थों का सेवन और पूर्ण आराम सामान्यतः पर्याप्त होता है ।
एस्पिरिन.,नॉनस्टीरायडल एंटीइन्फ्लेम्ट्री दवाईयॉ और स्टीरॉयड नही देना चाहिये ।
धडकन के बढ़ने ,नाड़ी दर कम होने,रक्तचाप कम होने,स्त्राव होने और पेशाब की कम मात्रा में होने आदि लक्षण दिखने पर मरीज़ को चिकित्सालय में भर्ती कर आई वी फ़्लूट देना आवश्यक हो जाता है ।
रक्तस्राव ज़्यादा होने पर खूनचढ़ाना ज़रूरी होता है ।
सामान्य प्लेटलेट काउंट १लाख से चार लाख होता है ।40,000 से कम होने पर प्लेटलेट्स चढ़ाना आवश्यक हो जाता है ।
डेंगू की रोकथाम ….
१-डेंगू मच्छर के काटने से फैलता है अतः आवश्यक है मच्छरों से बचना ।इसके लिए जहाँ तक हो सके पूरी आस्तीन के कपड़े पहने।
२-मास्क्यूटो रिपेलियेंट का उपयोग करें ।
३-कूलर ,फूलदान आदि में पानी जमा न होने दें ।
४-ज़्यादा से ज़्यादा पानी पिये ।
डेंगू २० फ़ार्मूला….

डेंगू में यदि पल्स रेट बीस से ज़्यादा हो जाए ,ऊपर का रक्तचापबीस सेज़्यादा कम हो जाए ,प्लेटलेट काऊंट 20, हज़ार से कम हो जाए ,हाथ हो दबाने पर एक इंच में लगभग बीस से ज़्यादा परप्यूरिक स्पॉट आ जाये तो डेंगू ख़तरनाक हो सकता है ।इस समय बीस एम एस पर KG बॉडी वेट के हिसाब से तरल पदार्थ देना शुरू कर देना चाहिए ।इसे डेंगू 20 का फ़ार्मुला कहते हैं ।
डेंगू और कोरोना में अंतर….
१-डेंगू मच्छर के काटने से पनपता है जबकि कोरोना श्वसन द्वारा पहुँचता है ।
२-डेंगू में जोड़ों में दर्द होता है ।
३-डेंगू में सर्दी खाँसी नहीं होती जो कोरोना में होती है ।
४-कोरोना में लॉस ऑफ़ से मैल होता है ।
५-डेंगू में सरदर्द ऑंखो के पीछे होता है जबकि कोरोना में माथे से शुरू होता है ।
अंत में…अपने आसपास साफ सफ़ाई रखिये
डेंगू से अपना बचाव करिये ।
डॉक्टर मंजुला साहू
सी एस ई बी चिकित्सालय
कोरबा पश्चिम ।






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