
आज भारतीय साहित्य जगत ने अपना एक अनमोल रत्न खोया।सिंधी के प्रसिद्ध साहित्यकार हरी हिमथाणी का देहांत हो गया।अजमेर वासी श्री हरी हिमथाणी पिछले कुछ दिनों से अस्वस्थ थे। केंद्रीय साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित रचनाकार के सृजन में 13 उपन्यास और 9 कहानी संग्रह शामिल हैं।श्री हरी हिमथाणी के सृजन की सर्वाधिक विशेष बात थी,उनकी भाषा जिसमें सिंधी की अपनी खुशबू है और अपना ही रंग।उनके पात्र सिंधी चरितत्रों का प्रतिनिधित्व करते हैं। विभाजन पश्चात भारत के सिंधी साहित्य में ऐसी भाषा दुर्लभ सी होती जा रही हैं।
उनका आत्मीय संसार बहुत बड़ा था-सीमा के आरपार।
उनका मुझ पर भी सदा स्नेह रहा।यह मेरा निजी दुःख तो है ही साहित्य संसार में क्षतिपूर्ति असम्भव है। उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि
