मैं झारखंड की हूँ यह कहते बहुत इतराती हूँ,
इसके बारे में पूछने पर हज़ार खूबियां गिनवाती हूँ,
कुदरत ने जी भर के प्यार यहाँ बरसाया है,
नदियों में सोना होने का प्रमाण स्वर्णरेखा ने दर्शाया है,
खनिजों का अपरंभण्डार है,
अभ्रक का पूरे विश्व में करता व्यपार है,
कोयला ही कोयला मिला है इसकी माटी में,
लोहा, इस्पात, चांदी जैसे कई अनमोल खनिज मिलते हैं इसकी माटी में,
नदियों की भी बात निराली है,
कहीं चौड़ी कहीं पतली,
कहीं पहाड़ो से झरनों की तरह गिरती सुंदर रूप वाली है,
कई झील कई झरने, मन को लगते हैं हरने,
पहाड़ो और जगलों ने इस राज्य को झारखण्ड जैसा सुंदर नाम दिलवाया,
चावल, गेंहू,आलू, मक्के, मसूर, यहाँ उजाते हैं
हरी साग सब्जियों से खेत यहाँ लहराते हैं,
बच्चे से लेकर बूढ़े तक मेहनत से नहीं घबराते हैं,
लोग यहाँ के भोले- भाले हैं,
भाषा में सबके प्यार है,
मेहनत करते हैं जी भर के,
लेकिन लुटती इनको सरकार है,
जो अनपढ़ है वो कुछ कहते नहीं है,
जो पढ़े -लिखे हैं वो बेरोजगार हैं,
पढ़े – लिखे युवा को दर -दर की ठोकर खानी पड़ती है,
सिर्फ एक इसी कारण से कहाँ मैं यहाँ रहती हूँ,
फिर भी मैं झारखण्ड से हूँ सबको गर्व से कहती हूँ|

चन्द्र प्रभा
गिरिडीह, झारखण्ड







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