
बिलासपुर में शासकीय कर्मचारियों की सुरक्षा और सम्मान को लेकर अब बड़ा मुद्दा सामने आया है। लगातार हो रही शिकायतों और आरोपों के बीच कर्मचारी संगठनों ने कड़ा रुख अपनाया है और साफ कहा है—बिना ठोस प्रमाण के किसी भी कर्मचारी पर कार्रवाई नहीं होनी चाहिए।दरअसल, पिछले कुछ दिनों से अंकित गौरहा द्वारा शासकीय कर्मचारियों पर लगातार आरोप लगाए जा रहे हैं। शिकायत और जांच के नाम पर कर्मचारियों को मानसिक दबाव और भय का सामना करना पड़ रहा है। ताजा मामला सुनील यादव का है, जो प्रदेश लिपिक वर्गीय शासकीय कर्मचारी संघ के प्रदेश महामंत्री हैं।इस मामले में पहले ही जिला स्तर पर चार सदस्यीय समिति ने जांच की थी, जिसमें सुनील यादव पर लगे सभी आरोप निराधार और बेबुनियाद पाए गए। इसके बावजूद दोबारा जांच का दबाव बनाया गया और नई समिति गठित की गई।

इतना ही नहीं, अब इस मामले को शासन स्तर तक ले जाकर लगातार पत्राचार और प्रचार किया जा रहा है।रोहित तिवारी ने साफ कहा कि यह पूरी प्रक्रिया समझ से परे है और इसमें सुनियोजित षड्यंत्र की आशंका नजर आती है। उन्होंने कहा कि बिना सत्यता के बार-बार शिकायत करना कर्मचारियों को परेशान करने जैसा है।कर्मचारी संघ ने इस पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर बिलासपुर के माध्यम से मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा है। इसमें मांग की गई है कि झूठी शिकायतों पर रोक लगे और संबंधित व्यक्ति के खिलाफ नियम अनुसार सख्त कार्रवाई की जाए।संघ ने चेतावनी दी है कि यदि इस तरह कर्मचारियों को निशाना बनाना बंद नहीं हुआ, तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने से भी पीछे नहीं हटेंगे। अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है।






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