
कोरबा धान की खरीदी का काम कोरबा जिले में अंतिम रूप से 6 फरवरी को समाप्त हो गया है। लगभग एक पखवाड़ा बीतने के बाद भी धान का उठाव नहीं हो सका है। काफी लचर व्यवस्था होने से समितियां परेशान हैं। कहा जा रहा है कि प्रशासन के निर्देश और मार्कफेड की ओर से कागजी कार्यवाही करने के बावजूद राइस मिलर्स की मनमानी जारी है। इस रवैये से धान उपार्जन केंद्रों की समितियों के सामने चुनौतियां खड़ी हो गई है।
जानकारी के अनुसार जिले में सत्र 2025-26 में 27 लाख 56 हजार मिट्रिक टन धान का उपार्जन 50 हजार से अधिक किसानों के द्वारा अपनी पहुंच बनाने से हुआ। अलग-अलग कारणों से इस बार किसानों का पंजीकरण ज्यादा हुआ, फिर भी सत्यापन सहित कई प्रकार के अड़ंगेबाजी के चक्कर में 17 हजार से ज्यादा किसान अपने खेत में उपार्जित धान को बेचने से वंचित रहे। सरकार ने घोषित तौर पर 15 नवंबर से धान की खरीदी शुरू की थी। जिले में अनेक केंद्रों में चार-पांच दिन बाद ही यह काम प्रारंभ हो सका। 31 जनवरी तक धान की खरीदी की गई। विभिन्न दिक्कतों को देखते हुए फरवरी में 5 और 6 तारीख को गिनती के कुछ किसानों से धान का उपार्जन किया गया और इसी के साथ सत्र की समाप्ति हो गई।
इस वर्ष धान की खरीदी कराने वाले अधिकारियों ने राइस मिलर्स के साथ अनुबंध किया जरूर लेकिन इसमें विलंब हुआ। हालिया स्थिति यह है कि मार्कफेड के द्वारा विभिन्न समितियों के तहत चल रहे उपार्जन केंद्रों के लिए डीओ तो काटे जा रहे हैं लेकिन उठाव की रफ्तार लचर है। अभी भी उपार्जन केंद्रों में 3 लाख मिट्रिक टन से ज्यादा धान का स्टॉक मौजूद है। इनमें मुख्य मार्गों के नजदीकी से लेकर दूरस्थ और हाथी प्रभावित क्षेत्र वाले उपार्जन केंद्र भी शामिल हैं। यहां पर हजारों क्विंटल धान का स्टॉक मौजूद है। समितियां इंतजार कर रही हैं कि कब मिलर्स की गाडियां यहां पहुंचे तो धान का उठाव कराया जा सके। उठाव में देरी होने से कई तरह के टेंशन बढ़ रहे हैं।







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