
कोरबा 13 फरवरी 2026। कोरबा में अदानी ग्रुप के पावर प्लांट के विस्तार को लेकर ग्रामीण लामबंद हो गये है। जनसुनवाई से पहले ही जिन गांवों पर विस्थापन की तलवार लटक रही है, वहां के ग्रामीणों ने सत्ता पक्ष से दूरी बनाते हुए पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल को ज्ञापन सौंपकर संरक्षण और हस्तक्षेप की मांग की है। ग्रामीणों ने कलेक्टर को भी ज्ञापन सौंपा है, जिसमें संयंत्र प्रबंधन पर पूर्व में किये वादों को आज तक पूरा नहीं किये जाने का आरोप लगाया है।
गौरतलब है कि कोरबा जिले में संचालित लैंका पाॅवर प्लांट का अधिग्रहण एक वर्ष पूर्व ही अदानी समूह ने किया है। घाटे में चल रहे इस संयंत्र को खरीदने के बाद अब अदानी समूह संयंत्र के विस्तार की तैयारी में है। 1600 मेगावाट विस्तार के लिए प्रबंधन द्वारा जनसुनवाई की तैयारी की जा रही है। लेकिन इस जन सुनवाई से पहले ही इसका विरोध शुरू हो गया है। संयंत्र विस्तार से प्रभावित होने वाले गांव के ग्रामीणों ने इस पूरे मामले को लेकर सत्ता पक्ष से दूरी बनाते हुए पर्वू मंत्री जयसिंह अग्रवाल से मुलाकात की।
सैकड़ों की संख्या में ग्रामीणों ने जयसिंह अग्रवाल से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा गया और संयंत्र विस्तार के विरोध के साथ ग्रामीणों के हित में संरक्षण और हस्तक्षेप की मांग की। वहीं ग्रामीणों के इस मांग पर पूर्व मंत्री ने अपना समर्थन देने का वादा किया। और ग्रामीणों के साथ बैठक की फोटो इंस्टाग्राम पर अपलोड कर ग्रामीणों की समस्या और उनके अधिकार के लिए हमेशा खड़े रहने की बात लिखी है।
पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म इंस्टाग्राम पर लिखा…”अदानी कोरबा पावर प्लांट पूर्व लैंको की प्रस्तावित भावी विस्तार परियोजना से प्रभावित होने वाले गाँवों के सैकड़ों ग्रामीणों ने आज मुलाकात कर अपनी समस्याओं और पीड़ा से अवगत कराते हुए ज्ञापन सौंपा। मैंने उनकी बातों को गंभीरता से सुना और आश्वस्त किया कि इस संघर्ष में वे अकेले नहीं हैं। मेरी पूरी संवेदनाएँ एवं समर्थन प्रभावित ग्रामवासियों के साथ हैं। जनहित और ग्रामीणों के अधिकारों की रक्षा के लिए उनकी आवाज़ को हर मंच पर पूरी मजबूती से उठाया जाएगा।”
कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर लगाया वादाखिलाफ़ी का आरोप
पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल से मुलाकात के बाद बड़ी संख्या में ग्रामीणों कलेक्टर कार्यालय पहुंचे। यहां ग्रामीणों ने कलेक्टर के नाम ज्ञापन सौंपकर गंभीर आरोप लगाये। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि साल 2005 में लैंको अमरकंटक संयंत्र के लिए गांव की जमीन अधिग्रहित की गयी थी, उस वक्त भी प्रबंधन ने ग्रामीणों को नौकरी, बेहतर सवास्थ्य सुविधा, सामुदायिक विकास का सपना दिखाया था। लेकिन संयंत्र स्थापित होने के बाद अधिकांश वादे आज भी अधूरे है। इसके बाद साल 2012-13 में तीसरी और चौथी इकाई के विस्तार के दौरान भी प्रबंधन ने यही आश्वासन दोहराए गये। लेकिन न तो रोजगार मिला और ना ही स्वास्थ्य और शिक्षा सुविधाओं का समुचित विकास हो सका। और अब पांचवीं और छठवीं इकाई के रूप में 1600 मेगावाट का नया विस्तार प्रस्तावित है। जिसे लेकर प्रभावित गांवों के ग्रामीण काफी आक्रोश में है।
9 गांव 750 मकान और 4 हजार लोगों पर संकट
पावर प्लांट के विस्तार का विरोध कर रहे ग्रामीणों ने इस विस्तार परियोजना ने सरगबुंदिया, अमलीभांठा, पहंदा, ढनढनी, संडेल, बरीडीह, खोड्डल, दर्राभाठा और पताढ़ी सहित 9 गांवों के लगभग 750 मकान प्रभावित होने की आशंका जतायी हैं। जिससे करीब 4 हजार लोगों के सामने विस्थापन की सीधी समस्या होगी, जिसे लेकर ग्रामीण अभी से लामबंद हो गये है। ऐसे में जन सुनवाई को लेकर ग्रामीणों का क्या रूख रहता है, ये तो आने वाला वक्त ही बतायेगा। लेकिन संयंत्र विस्तार के विरोध की लड़ाई में ग्रामीणों ने जिस तरह से सत्ता पक्ष से दूरी बनाते हुए कांग्रेस के पूर्व मंत्री से समर्थन मांगा है,







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