
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी जिला परिषद कोरबा छत्तीसगढ़
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के जिला सचिव पवन कुमार वर्मा ने आज संत रविदास जी के जन्मदिन पर अपने उद्बोधन में कहा कि संत रविदास जी का जन्म उत्तर प्रदेश के वाराणसी (काशी) में हुआ था। वे भारत के एक महान संत, कवि और समाज सुधारक थे।उनका मानना था कि ईश्वर मंदिर में नहीं, बल्कि इंसान के दिल में रहते हैं। वे जाति-पाति, छुआछूत और भेदभाव के सख्त खिलाफ थे।उनका सबसे प्रसिद्ध दोहा है- “मन चंगा तो कठौती में गंगा”।वे पेशे से जूते बनाने का काम करते थे और इसे अपनी पूजा मानते थे।हमें उनके बताए सच्चाई और प्रेम के मार्ग पर चलना चाहिए।उनका जीवन सादगी, सत्य और उच्च विचारों का प्रतीक था।समाज सुधार और
संत रविदास जी का जन्म जिस समय हुआ, उस समय समाज में ऊंच-नीच, छुआछूत और जातिवाद का बोलबाला था। उन्होंने अपनी रचनाओं और दोहों के जरिए सिखाया कि ईश्वर की नजर में कोई छोटा या बड़ा नहीं होता। उन्होंने दलितों और पिछड़ों को सम्मान से जीने की प्रेरणा दी। आज हमारा देश कई स्तरों पर संकट से गुजर रहा है। समाजीक ध्रुवीकरण, बढ़ती आर्थिक असमानता, पिछड़े समुदायों पर हिंसा और विचारों पर नियंत्रण। ऐसे समय में संत रविदास की प्रासंगिकता केवल ऐतिहासिक नहीं, बल्कि राजनीतिक और नैतिक है जब संविधान की प्रस्तावना में लिखे “समता” और ‘बंधुत्व’ सवालों के घेरे में हो तब रविदास की वाणी जवाब वन खड़ी होती है। जब श्रमिक और दलितों की आवाज को बार-बार दबाया जाए तब रविदास का जीवन प्रतिरोध का पाठ पढ़ाता है। जब धर्म को सत्ता का औजार, बनाया जाए, तब रविदास याद दिलाते हैं कि सच्चा धर्म मनुष्यता है, वर्चस्व नहीं संत रविदास की सबसे बड़ी विडंबना यह है कि बनाया है कि उनके जयंती पर मंचीय भाषणों तक सीमित कर दिया जाता है लेकिन उनके विचारों को सामाजिक व्यवहार में जगह नहीं मिलती, यह संत रविदास के साथ सबसे बड़ा अन्याय है संत रविदास आज भी सबसे प्रासंगिक चिंतकों में से एक हैं वे हमें आईना दिखाते हैं कि बिना सामाजिक न्याय की कोई भी देश नैतिक रूप से महान नहीं हो सकता।
पवन कुमार वर्मा
जिला सचिव
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी जिला कोरबा छत्तीसगढ़








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