
0 अंतरवर्ती फसल, रख-रखाव, ड्रिप सिंचाई एवं फेंसिंग पर बढ़ी सहायता राशि,
राज्य में खाद्य तेल उत्पादन में आत्मनिर्भरता हासिल करने के उद्देश्य से राज्य सरकार द्वारा ऑयल पाम खेती को बढ़ावा देने हेतु किसानों को प्रति हेक्टेयर अनुदान के साथ अतिरिक्त टॉप-अप अनुदान देने का निर्णय लिया गया है।। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की पहल पर कृषि विभाग ने इस नई व्यवस्था को स्वीकृति प्रदान की है, जिससे किसानों को दीर्घकालीन आर्थिक लाभ प्राप्त होगा।। यह अतिरिक्त सहायता राशि ऑयल पाम फसलों के रख-रखाव, अंतरवर्ती फसल, ड्रिप सिंचाई तथा फेंसिंग के लिए दी जाएगी।।
उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों ने दी जानकारी केंद्र एवं राज्य सरकार द्वारा 60:40 के अनुपात में प्रति हेक्टेयर 1.30 लाख रुपये का अनुदान दिया जा रहा है।।इसके अतिरिक्त राज्य सरकार द्वारा 69,620 रुपये प्रति हेक्टेयर का टॉप-अप अनुदान भी उपलब्ध कराया जाएगा।। रख-रखाव के लिए पूर्व में प्रदत्त 5,250 रुपये के अतिरिक्त 1,500 रुपये प्रति हेक्टेयर, अंतरवर्ती फसल हेतु 5,250 रुपये के साथ 5,000 रुपये प्रति हेक्टेयर तथा ड्रिप सिंचाई के लिए 14,130 रुपये के अतिरिक्त 8,635 रुपये प्रति हेक्टेयर की अतिरिक्त सहायता दी जाएगी।। इसके साथ ही पहली बार फेंसिंग हेतु 54,485 रुपये प्रति हेक्टेयर का अनुदान भी प्रदान किया जाएगा।।
ऑयल पाम एक दीर्घकालीन फसल है जिसमें रोपण के चौथे वर्ष से उत्पादन प्रारंभ होकर लगभग 30 वर्षों तक निरंतर आय प्राप्त होती है।। पारंपरिक तिलहनी फसलों की तुलना में इसकी तेल उत्पादन क्षमता चार से छह गुना अधिक होती है, जिससे यह फसल किसानों के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध होती है।।
किसानों को ऑयल पाम खेती से प्रत्यक्ष रूप से अवगत कराने के उद्देश्य से जिले के 75 कृषकों को महासमुंद जिले के ग्राम बलेशर स्थित ऑयल पाम कृषक के प्रक्षेत्र का भ्रमण कराया गया।। जहाँ उन्होंने खेती की प्रक्रिया और लाभ को नजदीक से समझा।। खैरागढ़-छुईखदान-गण्डई जिले की मिट्टी एवं जलवायु ऑयल पाम खेती के लिए अनुकूल पाई गई है
जिससे जिले में इसकी खेती लाभप्रद होने की संभावना है,
अनुदान का लाभ लेने के इच्छुक किसान जिले के उद्यानिकी विभाग कार्यालय अथवा विकासखण्ड स्तर पर पदस्थ उद्यानिकी अमले से संपर्क कर सकते हैं।।








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