
जिले में किसानों की बदहाली एक बार फिर सामने आई है। बीते 24 घंटे के भीतर धान की फसल बेचने में आ रही परेशानियों से टूटे दो आदिवासी किसानों ने जहरीले पदार्थ का सेवन कर आत्महत्या का प्रयास किया। पहली घटना में समर सिंह गौड़ और इसके बाद वैशाखू मरकाम ने अपनी ही खेती में उगाए गए धान की बिक्री नहीं हो पाने से आहत होकर कीटनाशक खा लिया। दोनों किसानों को समय रहते उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनकी स्थिति पर निगरानी रखी जा रही है।इन घटनाओं से आक्रोशित युवा कांग्रेस समेत विभिन्न संगठनों के कार्यकर्ताओं ने मंगलवार को कोरबा कलेक्ट्रेट गेट के सामने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने अपने ऊपर सफेद कपड़ा ओढ़कर सड़क पर लेटकर प्रतीकात्मक प्रदर्शन किया। उनका कहना था कि यदि किसानों की समस्याओं का समय रहते समाधान नहीं किया गया, तो यही हालात उनकी जिंदगी पर भारी पड़ते रहेंगे।प्रदर्शन कुछ देर तक चला, जिससे मार्ग से गुजरने वाले लोगों का ध्यान भी इस गंभीर मुद्दे की ओर गया। कार्यकर्ताओं ने सरकार और प्रशासन से धान खरीदी व्यवस्था में सुधार, किसानों को समय पर भुगतान और उनकी समस्याओं का तत्काल समाधान करने की मांग की। उनका कहना था कि बार-बार आत्महत्या के प्रयास यह दर्शाते हैं कि व्यवस्था में कहीं न कहीं गंभीर चूक हो रही है।वहीं, मामले पर प्रशासन ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि आत्महत्या के प्रयास की जांच की जा रही है और संबंधित किसानों की समस्याओं को गंभीरता से लिया गया है। अधिकारियों के अनुसार प्रभावित किसानों को आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई जा रही है तथा धान बिक्री से जुड़ी दिक्कतों के समाधान के लिए संबंधित विभागों को निर्देश दिए गए हैं।जिले में लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाओं ने एक बार फिर किसान संकट को उजागर कर दिया है, जिससे यह सवाल खड़ा हो रहा है कि आखिर कब तक किसान अपनी मेहनत की फसल के लिए संघर्ष करता रहेगा।










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