
रायपुर। धान खरीदी शुरू होने से ठीक एक दिन पहले हड़ताली सहकारी समिति कर्मियों पर सरकार ने कड़ा डंडा चला दिया। अधिकारियों की चेतावनी, नोटिस और बातचीतl बेअसर रहने के बाद पांच समिति प्रबंधकों को बर्खास्त कर दिया गया। धान खरीदी की तैयारियों में बाधा डालने वाली हड़ताल को सरकार सीधे सिस्टम पर हमला मान रही है, इसलिए अब मशीनरी को किसी भी कीमत पर जाम नहीं होने देने की तैयारी तेज कर दी गई है। दूसरी तरफ वैकल्पिक व्यवस्था का दावा भी किया जा रहा है, ताकि 15 नवंबर से खरीदी प्रक्रिया प्रभावित न हो।
धान खरीदी सीजन शुरू होने से पहले ही सहकारी समितियों की हड़ताल ने राज्य सरकार की चिंता बढ़ा दी थी। खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 के तहत 15 नवंबर से MSP पर धान खरीद की तैयारी चल रही है, जिसके लिए प्रदेश की 2058 पैक्स समितियों के अधीन 2739 उपार्जन केंद्र बनाए गए हैं। लेकिन पैक्स समितियों के सहकारी कर्मचारी संघ और कंप्यूटर ऑपरेटर संघ की अनिश्चितकालीन हड़ताल ने पूरे सिस्टम को झटका दे दिया।
चार सूत्रीय मांगों पर अड़े कर्मचारी, बातचीत भी बेनतीजा
शासन स्तर पर कई दौर की चर्चा के बावजूद कर्मचारी अपनी मांगों पर अडिग रहे। हड़ताल के कारण—
धान खरीदी की तैयारी,
रबी ऋण वितरण,
और पीडीएस जैसी अहम गतिविधियां ठप होने लगीं।
अधिकारियों ने हड़ताल खत्म कर काम पर लौटने के निर्देश दिए थे। नोटिस भी जारी किए गए, लेकिन कई कर्मचारी न तो उपस्थित हुए और न ही कोई जवाब दिया।गंभीर दुराचार मानकर पांच समिति प्रबंधक बर्खास्त
लगातार चेतावनी के बावजूद काम पर नहीं लौटने पर संचालक मंडल ने इसे गंभीर दुराचार मानते हुए कार्रवाई की।
14 नवंबर को जिन पांच प्रबंधकों को सेवामुक्त किया गया, वे हैं—
नरेंद्र साहू – प्राथमिक कृषि साख सहकारी समिति छाती, जिला धमतरी
ईश्वर श्रीवास – समिति बोरतलाव, जिला राजनांदगांव
गोविंद नारायण मिश्रा – पैक्स सोसायटी चांपा
किशुन देवांगन – समिति गठुला, जिला राजनांदगांव
चंद्रप्रताप सिंह – सेवा सहकारी समिति लखनपुर
इनकी सेवाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी गईं।
कार्रवाई के बाद कई कर्मचारी काम पर लौटने का दावा
बर्खास्तगी का आदेश जारी होने के बाद प्रदेशभर में कई प्रबंधक और कर्मचारी वापस काम पर लौटने लगे हैं। विभागीय सूत्रों के अनुसार, यह कार्रवाई स्पष्ट संदेश के रूप में देखी जा रही है कि धान खरीदी व्यवस्था में बाधा बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
सरकार हड़ताल तोड़ने मूड में, वैकल्पिक व्यवस्था का दावा भी
धान खरीदी शुरू होने से ठीक पहले सरकार ने यह कदम इसलिए उठाया है कि मशीनरी ठप न पड़े।
सरकार की ओर से संकेत हैं कि—
जरूरत पड़ने पर अस्थायी कर्मचारियों की तैनाती,
अन्य विभागों की मदद,
जिला प्रशासन की सीधी निगरानी
जैसी वैकल्पिक व्यवस्थाएं सक्रिय की जा सकती हैं। शासन प्रशासन दोनों स्तरों पर यह सुनिश्चित करने की कोशिश है कि 15 नवंबर को उपार्जन केंद्र खुलें और धान खरीदी अटकने न पाए







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