बीमा क्षेत्र में 100% विदेशी निवेश आत्मघाती कदम : ऑल इंडिया इंश्योरेंस एम्प्लाईज़ एसोसिएशन

समग्र बीमा संशोधन विधेयक 2025 पर उठाए सवाल, LIC और PSGI में निजी क्षेत्र की नियुक्तियों का किया विरोध

खबर – मनोज पाहुजा (कोरबा)

कोरबा, 12 अक्टूबर 2025।ऑल इंडिया इंश्योरेंस एम्प्लाईज़ एसोसिएशन (AIIEA) ने रविवार को आयोजित पत्रकार वार्ता में केंद्र सरकार के बीमा क्षेत्र से जुड़े हालिया फैसलों को “राष्ट्रीयकरण विरोधी” और “आत्मघाती कदम” बताया। संगठन ने कहा कि बीमा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) को 100 प्रतिशत तक बढ़ाने की तैयारी देश की आर्थिक संप्रभुता और जनता की बचत, दोनों के लिए खतरा है।संघ के सह सचिव धर्मराज महापात्र ने प्रेस वार्ता में बताया कि AIIEA भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) के 85% से अधिक कर्मचारियों का प्रतिनिधित्व करता है। उन्होंने कहा कि संगठन का गठन वर्ष 1951 में हुआ था, यानी कि एलआईसी के जन्म (1956) से भी पहले।

सरकार का दोहरा चरित्र : स्वदेशी की बात, विदेशी पूंजी का स्वागत

महापात्र ने कहा कि सरकार एक ओर “स्वदेशी अपनाने” का नारा देती है, वहीं दूसरी ओर विदेशी पूंजी को आमंत्रित कर रही है।उन्होंने कहा, “जब 74 प्रतिशत एफडीआई सीमा के बावजूद केवल 32.67 प्रतिशत निवेश आया है, तो इसे 100 प्रतिशत करने का क्या औचित्य है? यह निर्णय पूरी तरह विदेशी कंपनियों के हित में है।”

समग्र बीमा संशोधन विधेयक 2025 पर तीखा हमला

AIIEA ने कहा कि प्रस्तावित समग्र बीमा संशोधन विधेयक 2025 के जरिए सरकार बीमा अधिनियम 1938, LIC अधिनियम 1956 और IRDA अधिनियम 1999 जैसे कानूनों को कमजोर करने जा रही है।प्रेस नोट में कहा गया कि सरकार इन संशोधनों के माध्यम से “संसद की जवाबदेही से बचने और विदेशी कंपनियों को लाभ पहुंचाने” का प्रयास कर रही है।

LIC और PSGI में निजी क्षेत्र से नियुक्तियों पर आपत्ति

संघ ने मंत्रिमंडल की नियुक्ति समिति (ACC) के हालिया आदेशों को लेकर भी नाराज़गी जताई है। इन आदेशों के तहत LIC, सार्वजनिक क्षेत्र की सामान्य बीमा कंपनियों (PSGI) और बैंकों में निजी क्षेत्र के उम्मीदवारों को शीर्ष पदों पर नियुक्त करने का रास्ता खोला गया है।AIIEA के अनुसार, यह निर्णय न केवल सार्वजनिक क्षेत्र के अधिकारियों के मनोबल को गिराएगा, बल्कि “राष्ट्रीयकरण की मूल भावना” पर भी सीधा प्रहार है।रोजगार सृजन और नई भर्ती की मांगमहापात्र ने कहा कि एलआईसी आज 55 लाख करोड़ रुपए की परिसंपत्तियों का प्रबंधन कर रहा है और 40 करोड़ से अधिक पॉलिसी धारकों को सेवाएं प्रदान कर रहा है, फिर भी कई वर्षों से नई भर्ती नहीं की गई है।उन्होंने कहा, “इतनी विशाल संस्था में नई भर्ती का रुकना सरकार की कथनी और करनी के अंतर को उजागर करता है।

”संघ की प्रमुख मांगें

1. बीमा क्षेत्र में FDI को 100% तक बढ़ाने के प्रस्ताव को तत्काल वापस लिया जाए।

2. समग्र बीमा संशोधन विधेयक 2025 को रद्द किया जाए।

3. LIC और PSGI में शीर्ष पदों पर निजी क्षेत्र से नियुक्तियों को निरस्त किया जाए।

4. बीमा क्षेत्र में नई भर्तियों की प्रक्रिया जल्द शुरू की जाए।

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