आज सबसे बड़ा खतरा लालच से है ना कि महामारी से है…

कोविड 19 से उपजी वैश्विक महामारी कोरोना वायरस से उतनी खतरा नहीं है ,मुझे लगता है इससे भी कहीं अधिक खतरा लोग समृद्धि पाने के लिए आज जो लालच कर रहे हैं वह सबसे बड़ा खतरनाक नजर आ रहा है।
दोस्तों आप भी अपने आसपास ऐसे लोगों को जरूर देखते होंगे जो जीवन भर संघर्ष ही इसीलिए करते हैं ताकि वो समृद्ध बन सके और वो और उनका परिवार आरामदायक जीवन बिता सकें
लेकिन हम आपसे यह कह रहे हैं कि यह समृद्धि ही दुनिया के लिए सबसे बड़ा खतरा आज बन गया है , तो शायद आपको यकीन नहीं होगा और आप हो सकता है कि या कुछ और लोग मेरे से यह सुनकर नाराज भी हो जाए ।
दोस्तों पिछले दिनों ही एक सर्वे में ऑस्ट्रेलिया , ब्रिटेन और स्विट्जरलैंड के वैज्ञानिकों द्वारा दावा किया गया था कि दुनिया के लिए सबसे बड़ा खतरा आज कोरोना वायरस नहीं है बल्कि समृद्धि है। आज दोस्तों हम सब भी देख रहे हैं कि और इन वैज्ञानिकों ने भी दावा किया है कि कुछ इंसान जरूरत से ज्यादा चीजों का संचय कर रहे हैं और यही आदत प्रकृति के लिए खतरा बन गई है। इन वैज्ञानिकों के मुताबिक आज इंसान संसाधनों का जरूरत से ज्यादा उपभोग कर रहे हैं , और यही इंसानों की लालच प्रदूषण, ग्लोबल वार्मिंग ,प्राकृतिक आपदाओं ,पानी के संकट और बिगड़ते मौसम के लिए जिम्मेदार है। इसी असंतुलन के कारण ही आज गरीब और गरीब होते जा रहे हैं और अमीर और अमीर होता जा रहा हैं । जबकि संसाधनों पर सभी का बराबर का अधिकार होना चाहिए। आज देखा जाए तो 10 फीसदी लोग 90 फीसदी संसाधनों पर कब्जा किए हुए हैं ,वही 90 फीसदी लोग 10 फीसदी संसाधनों पर किसी तरह गुजर बसर कर रहे हैं। जबकि संविधान के अनुच्छेद 14 में सभी के बराबरी की बात कही गई है।
मेरा एक सवाल है आपसे आज अगर आपको खुशी या पैसे में से किसी एक को चुनने का विकल्प देते हैं हम तो आप किसको चुनना चाहेंगे ? दोस्तों किसी भी देश की समृद्धि की पहचान उस देश की जीडीपी की विकास दर से तय होती है। हम सभी को बार-बार बताया जाता है कि देखो कैसे वह व्यक्ति दुनिया का सबसे अमीर आदमी बन गया। लेकिन आज हम यह बात करने का कोशिश कर रहे हैं कि सबसे ज्यादा वैल्यू किसे दी जानी चाहिए। अगर किसी व्यक्ति के पास आथाह दौलत , पैसा है या उस व्यक्ति को जिसके पास असीम शांति और आनंद है। किसको आप चाहेंगे ? ऐसा तो नहीं ना कि हम जीडीपी को समृद्धि का पैमाना मानने के चक्कर में हमने अपने ग्रॉस डोमेस्टिक पीस मतलब शांति का तिरस्कार तो नहीं कर रहे हैं। वैसे आपको क्या अपनी जिंदगी में चाहिए शांति या समृद्धि ?
हाल ही में वर्ल्ड इकोनामिक फोरम की ग्लोबल रिस्क रिपोर्ट के मुताबिक आने वाले 10 वर्षों में इंसानों को सबसे ज्यादा खतरा परमाणु हथियारों से नहीं होगी। बल्कि सबसे ज्यादा खतरा जलवायु परिवर्तन से ही होगा। इंसान के लालच के कारण आने वाले 10 वर्षों के बाद सर्वे के मुताबिक आने वाले समय में गर्मी सबसे बड़ी समस्या होगी फिर प्रदूषण और जल संकट को भी सबसे बड़ा खतरा माना जा रहा है और अब तो जंगलों में जिस प्रकार से आग लग रही है इससे भी हमारे जैव विविधता के साथ असंतुलन पैदा हो रहा है । इन सब का कारण एक ही चीज है दोस्तों वह है इंसानों का लालच और जरूरत से ज्यादा समृद्धि की चाहत और इसी चाहत ने हमें आज कोरोना वायरस जैसी महामारी तोफे में मिला है ।
आज दोस्तों कोरोना वायरस ने यह भी बता दिया है कि दुनिया का कोई भी इंसान चाहे वह कितना भी धनवान क्यों ना हो, शक्तिशाली क्यों ना हो, किसी भी धर्म या जाति का क्यों ना हो, इस वायरस के लिए सभी बराबर है। मतलब मेरा कहने का है कि यह कोरोना वायरस ने दुनिया के 750 करोड़ लोगों को एक ही दृष्टि से देखता है। आज हम इंसानों को यह कभी नहीं भूलना चाहिए की यह वायरस भी प्राकृतिक के दोहन व उसके साथ छेड़छाड़ का ही परिणाम है और इसने दुनिया के हर इंसान को एक जैसा सबक दिया है आज लेकिन याद रखना दोस्तों यह संकट अभी खत्म नहीं हुआ है और वैज्ञानिक भी मानते हैं कि यह तो आने वाले और भी बड़े संकटों की शुरुआत है।
एक सर्वे के मुताबिक इस महामारी के वजह से सबसे ज्यादा नुकसान भी दुनिया की अर्थव्यवस्था को ही होगा और आर्थिक मंदी लंबे समय तक बनी रहेगी। अपने भारत में तो हमारे अन्नदाता ही इस गिरती हुई अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाएंगे।
दोस्तों प्रकृति इंसानों के लालच को रोकना जानती है और वह समय-समय पर अपने तरीके से इंसानों को यह संदेश भी देती रहती है कि यह लालच अस्थाई है और प्रकृति के आगे कोई भी लालच लंबे समय तक नहीं टिक सकती हैं।
दोस्तों हम यह नहीं कह रहे हैं कि आप पैसे ना कमाओ और अपने ऊपर खर्च ना करो, हम पैसा कमाते ही इसीलिए हैं की अपने और अपनों के ऊपर खर्च करें जिससे हम खुश रह सके लेकिन क्या आप यह जानते हैं कि जरूरत से ज्यादा उपभोग करने से पर्यावरण और प्रकृति पर असर तो होता ही है साथ ही दूसरे के अधिकारों को भी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रुप से खत्म कर देते हैं।
अमेरिका के म्यूजियम ऑफ नेचुरल हिस्ट्री के मुताबिक 1970 में दुनिया की जनसंख्या आज के मुकाबले आधी थी मतलब तब पृथ्वी पर 370 करोड़ लोग रहते थे और आज यह संख्या बढ़कर करीब 750 करोड़ हो चुकी है । अगर इन 50 वर्षों की तुलना करें तो आज इंसान ने पृथ्वी पर ज्यादा जगह घेर लिया है।यह सब जगह कहां से आ रहा है आखिर में इंसानों को रहने के लिए यह सब जगह जंगलों को काट कर ही बनाई जा रही है इसीलिए आज हमारा प्राकृति असंतुलित हो चुकी है l
दोस्तों एक तरफ तो लोग ओवरन्यूट्रिशन से परेशान है तो वहीं दूसरी तरफ लोग मालनूट्रिशन से परेशान हैं। संयुक्त राष्ट्र की हाल ही के एक रिपोर्ट के मुताबिक पूरी दुनिया में हर साल 130 करोड़ किलोग्राम खाना बर्बाद हो जाता है, जिसकी कीमत 75 लाख करोड़ से भी ज्यादा होती है । और तो और पूरी दुनिया में जो हर वर्ष कार्बन का उत्सर्जन होता है उसमें भी फूड प्रोडक्शन की हिस्सेदारी 22 फीसदी से भी अधिक होती है , फिर भी हम देखते हैं कि दुनिया के करोड़ों लोग हर साल बड़ी मात्रा में खाना को बर्बाद करते हैं और प्रकृति को नुकसान पहुंचाते रहते हैं । ऐसा हाल तब है जब दुनिया के करीब 190 करोड़ लोग आज मोटापे का शिकार हैं और लगभग इसके दुगुने लोग कुपोषण का शिकार है। दोस्तों धनवान बनना या समृद्धि हासिल करना गलत नहीं है।लेकिन जब लालच की सीमाओं को लोग पार करने लगते हैं तब समस्या बननी शुरू हो जाती है । आज पूरे दुनिया में जो लोग सबसे अमीर है उनकी आबादी में हिस्सेदारी आधा प्रतिशत से भी कम है। लेकिन यही 4 करोड़ लोगों का जीवन जीने का तरीका 14 फीसदी कार्बन उत्सर्जन के लिए जिम्मेदार है। जबकि दोस्तों पूरे दुनिया के लगभग 400 करोड़ लोग ऐसे हैं जो किसी तरह से अपना जीवन यापन करते हैं और कार्बन उत्सर्जन में इनकी बहुत काम हिस्सेदारी होती है। सर्वे के मुताबिक प्रकृति को 43 फीसदी नुकसान उन 10 फीसदी लोगों की लाइफ स्टाइल से पहुंचता है जो आज कमाई के मामले में सबसे ऊपर है।
ऑक्सफाम ने भी अपने रिपोर्ट बताया था कि दुनिया के 1 फ़ीसदी अमीरों के पास जितनी संपत्ति है वो दुनिया के 700 करोड़ लोगों की कुल संपत्ति से भी दोगुनी है । पूरे दुनिया की आबादी को देखे तो आज भी औसतन 410 रुपए प्रतिदिन ही कमा पाती है । दोस्तों हमारे कहने का मतलब एक ही है कि और आप भी समझ गए होंगे कि आज के दौर में करेंसी ही सिर्फ पैसा नहीं है बल्कि आपकी खुशी आपकी शांति भी नए जमाने की कहीं ना कहीं करेंसी ही है और इनमें सबसे ज्यादा महत्व हम जिस करेंसी को आज देना चाहते हैं वह है मेरे मुताबिक आपका स्वास्थ्य और आपका खुशहाल जीवनशैली । क्योंकि दोस्तों आज के वक्त में जिसके पास स्वास्थ्य और खुशहाल जीवन शैली है वही सबसे ज्यादा समृद्ध है इसलिए हमारा असली वेल्थ स्वस्थ शरीर और खुशहाल जीवनशैली ही होना चाहिए।
दोस्तों जो व्यक्ति 1900 में पैदा हुआ होगा वह अपने 11 वर्ष की उम्र में ही हैजा जैसी महामारी का सामना किया होगा, और जैसे ही वह 14 वर्ष की उम्र में गया होगा वह प्रथम विश्व युद्ध भी देखा होगा, जिसमें दो करोड़ 20 लाख लोग मारे गए थे। और जैसे ही वह व्यक्ति 18 वर्ष का हुआ होगा तब इन लोगों ने जैसे आज महामारी है वैसे ही एक महामारी स्पेनिश फ्लू आई थी इस महामारी से करीब करीब 5 करोड़ लोग मारे गए थे । और जैसे ही वह व्यक्ति 29 वर्ष का हुआ होगा तब उसने विश्व का सबसे बड़ी आर्थिक मंदी देखा होगा जिसकी शुरुआत 1929 में हुई थी और यह कई वर्षों तक चलती रही थी । जब यही पीढ़ी 40 साल उम्र का हुआ होगा तब दूसरा विश्वयुद्ध देखा होगा और 45 वर्ष उम्र होने तक यह युद्ध जारी रहा था और इसमें 6 करोड लोगो से भी अधिक लोग मारे गए थे । इसी दौरान बंगाल में भयंकर अकाल भी पडा था , जिसमें भी लाखो लोग मारे गए थे। जब यही लोग 47 वर्ष के हुए होंगे तो देश का बंटवारा देखा और 71 वर्ष की होने पर भारत और पाकिस्तान का युद्ध देखा लेकिन हमारे युवाओं को आज लगता है कि जीवन कितना मुश्किल है और बुजुर्गों को कहते हैं कि आज के जिंदगी बड़ी कठिन है। दोस्तों हमारी पिछली पीढ़ी ने कई युद्ध कई संकट और कई महामारी देखा है और उसका मुकाबला भी किया। आज इस वैश्विक महामारी के बावजूद भी हमारे पास सारी सुख सुविधाएं हैं । 100 साल से आनेे वाली महामारी अभी बार-बार हमें यही सिखा रही है कि हमें इतिहास से सबक लेकर आगे बढ़ना होगा और अपने प्राकृतिक के साथ तालमेल बैठाना ही होगा

विक्रम चौरसिया

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