प्रेमचंद जयंती पर बतौली महाविद्यालय में हुआ विशेष कार्यशाला का आयोजन

“बूढ़ी काकी” कहानी का बी.ए. प्रथम सेमेस्टर के विद्यार्थियों ने किया नाट्य प्रस्तुतीकरण”

“प्रेमचंद के साहित्य पर केंद्रित पोस्टर प्रदर्शनी का विद्यार्थियों ने किया अवलोकन”

(बतौली) शासकीय महाविद्यालय बतौली (सरगुजा) में प्रेमचंद जयंती पर एक कार्यशाला का आयोजन 05 अगस्त 2025 को किया गया। अजीम प्रेमजी फाउंडेशन बतौली (सरगुजा) के शिक्षण अधिगम केंद्र के सहयोग से आयोजित कार्यशाला में मुख्य वक्ता चंद्रभान ने “प्रेमचंद और भारतीय संविधान” शीर्षक पर पावर प्वाइंट प्रस्तुतिकरण और प्रश्नोत्तरी के माध्यम से व्याख्यान दिया। महाविद्यालय के प्राचार्य बी. आर. भगत ने कार्यशाला की अध्यक्षता किया। कार्यशाला में प्रो. तारा सिंह मरावी, प्रो. गोवर्धन प्रसाद सूर्यवंशी, प्रो. बलराम चंद्राकर, प्रो. सुभागी भगत, प्रो. मधुलिका तिग्गा, अतिथि शिक्षक शिल्पी एक्का, के साथ अर्पण विशिष्ट अतिथि के रूप में मंचासीन थे। कार्यशाला के पूर्व प्रेमचंद के साहित्य पर केंद्रित पोस्टर प्रदर्शनी का आयोजन किया गया जिसमें विद्यार्थियों ने प्रेमचंद जी के साहित्य के विभिन्न पात्रों एवं उनके द्वारा प्रयुक्त संवादों का अवलोकन किया। कार्यशाला का शुभारंभ छत्तीसगढ़ महतारी के पूजन अर्चन के साथ हुआ। बी.ए. प्रथम सेमेस्टर की विद्यार्थी सोनमति यादव एवं सहेलियों के द्वारा छत्तीसगढ़ का राजकीय गीत प्रस्तुत किया गया।

कार्यशाला के प्रथम सत्र में मुख्य वक्ता मुख्य वक्ता चंद्रभान ने “प्रेमचंद और भारतीय संविधान” शीर्षक पर प्रेमचंद के कहानियों और उपन्यासों में वर्णित वैचारिकी का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रेमचंद समाज में समरसता के पक्षधर के तौर पर अपनी छवि स्थापित किया। उनके कहानियों में व्यक्ति की विचार अभिव्यक्ति के साथ बिना किसी भेदभाव के न्याय पाने के अधिकार का चित्रण विभिन्न पात्रों के माध्यम से किया है। प्रेमचंद के साहित्य में तत्कालीन जीवन का सूक्ष्मता से चित्रण के साथ जन-जीवन में सभी वर्गों को मिलजुल कर रहने का संदेश दिया है। अजीम प्रेमजी फाउंडेशन के प्रशिक्षक चंद्रभान ने प्रेमचंद के साहित्य पर आधारित “प्रश्नोत्तरी” का आयोजन किया गया जो प्रेमचंद के साहित्य और वर्तमान भारतीय संविधान के विभिन्न अनुच्छेदों पर केंद्रित था। प्रेमचंद के साहित्य में वर्णित तत्कालीन परिस्थितियों के आधार पर वर्तमान संवैधानिक मूल्यों पर चर्चा किया गया। प्रेमचंद के साहित्य के अध्ययन के संबंध में युवाओं से आगे संवाद हुआ। विद्यार्थियों ने उत्साह पूर्वक प्रश्नोत्तरी में सहभागिता करते हुए प्रश्नों का जवाब दिया।

कार्यशाला में अपने विचार रखते हुए हिंदी विभाग के प्राध्यापक प्रो. गोवर्धन प्रसाद सूर्यवंशी ने प्रेमचंद के “आदर्शोंन्मुखी यथार्थवाद” के आधार पर अपने साहित्य में समस्याओं के चित्रण के साथ उनके समाधान का जिक्र करते हुए कहा कि आजादी से पूर्व लिखे गए साहित्य के पात्र एवं घटनाक्रम आज भी प्रासंगिक है। उन्होंने प्रेमचंद के दो प्रसिद्ध उपन्यास “गोदान” और “गबन” का सारांश प्रस्तुत करते हुए “गोदान” के कृषक जीवन की समस्याओं को तत्कालीन समय के किसानों से जोड़ते हुए वर्तमान दुर्दशा का चित्रण किया। इसी तरह “गबन” के पात्र “रमानाथ” और “जालपा” के माध्यम से वर्तमान समय के युवाओं की विलासिता पूर्ण जीवन और आभूषणप्रियता की समस्या का उल्लेख किया।

द्वितीय सत्र में बी.ए. प्रथम सेमेस्टर के विद्यार्थियों ने प्रेमचंद की प्रसिद्ध कहानी “बूढ़ी काकी” का नाट्य रूपांतरण का प्रस्तुतीकरण किया किया जिसमें अजीत कुमार ने “बुद्धि राम” का महिमा तिर्की ने “रूपा” का, मन प्यारी पैकरा ने “बूढ़ी काकी” का और रीना सिंह ने “लाडली” का अभिनय बहुत ही बेहतरीन ढंग से किया। “बूढ़ी काकी” कहानी का नाट्य रूपांतरण हिंदी विभाग के प्रमुख प्रो. गोवर्धन प्रसाद सूर्यवंशी ने किया था।

छात्रों के साथ हुए संवाद में हिंदी साहित्य विकास परिषद के विद्यार्थियों ने अपने-अपने विचार प्रस्तुत किये।

कार्यक्रम का संचालन सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रभारी प्रो. गोवर्धन प्रसाद सूर्यवंशी ने किया। राष्ट्रीय सेवा योजना के कार्यक्रम अधिकारी प्रो. तारा सिंह ने आभार प्रदर्शन किया। प्रेमचंद जयंती पर आयोजित कार्यशाला में हिंदी साहित्य विकास परिषद के विद्यार्थियों के साथ राष्ट्रीय सेवा योजना के स्वयंसेवक, राष्ट्रीय शिक्षा नीति के महाविद्यालयीन एंबेसडर एवं स्वीप के कैंपस एंबेसडर सहित कला, विज्ञान और वाणिज्य संकाय के विद्यार्थीगण उपस्थित रहे।

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