पुनर्वास की राह पर लौटे भटके कदम, 6 इनामी समेत 9 माओवादियों ने किया आत्मसमर्पण।

अखिलेश उप्पल, बीजापुर

बीजापुर – जिले में नक्सल उन्मूलन अभियान को बड़ी सफलता मिली है। माड़ डिवीजन और दक्षिण बस्तर क्षेत्र से जुड़े कुल 9 सक्रिय माओवादियों ने सोमवार को पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया। इनमें 6 इनामी माओवादी शामिल हैं, जिन पर कुल 24 लाख रुपये का इनाम घोषित था।आत्मसमर्पण करने वालों में माड़ डिवीजन की कंपनी नंबर 1 और प्लाटून नंबर 12 और 13 के एसीएम, टेक्निकल विंग और चिन्नापल्ली एरिया कमेटी से जुड़े सदस्य शामिल हैं। इन सभी ने बीजापुर पुलिस अधीक्षक डॉ. जितेन्द्र यादव, डीआईजी कमलोचन कश्यप, कोबरा बटालियन व केरिपु के वरिष्ठ अफसरों की मौजूदगी में हथियार डाले।आत्मसमर्पित माओवादियों में शामिल – बक्सू ओयाम (कंपनी नं.1) 8 लाख इनामी, बुधराम पोटाम (प्लाटून 12 ACM) 5 लाख इनामी, हिड़मा ऊर्फ हिरिया (प्लाटून 13 ACM) 5 लाख इनामी, मंगू ऊईका ऊर्फ टोग्गी (टेक्निकल टीम सदस्य) 2 लाख इनामी, रोशन कारम ऊर्फ सोनू ऊर्फ अजित (DGN एरिया कमेटी) 2 लाख इनामी, मंगलो पोड़ियाम (पार्टी सदस्य) 2 लाख इनामी। इसके अलावा, कमलू हेमला, बुधराम हेमला और पंडरू पूनेम जैसे माओवादी भी इस सूची में शामिल हैं, जो भूमकाल मिलिशिया और यूएकेएमएस से जुड़े रहे हैं।आत्मसमर्पण के पीछे बदले हालात और सरकार की नीति।पुलिस अधिकारियों का मानना है कि यह आत्मसमर्पण छत्तीसगढ़ शासन की नई पुनर्वास नीति, नियद नेल्लानार योजना और सुरक्षा बलों की आक्रामक रणनीति का प्रत्यक्ष परिणाम है।इन योजनाओं के तहत माओवाद छोड़ने वालों को पुनर्वास, रोजगार, शिक्षा, और प्रोत्साहन राशि जैसे लाभ दिए जा रहे हैं। आत्मसमर्पण करने वाले सभी माओवादियों को 50,000- 50,000 की प्रोत्साहन राशि भी सौंपी गई।बदलते बस्तर की तस्वीर।बीजापुर जैसे अति- संवेदनशील जिलों में सड़क निर्माण, स्वास्थ्य सुविधाएं, स्कूल और बिजली जैसी मूलभूत सेवाओं के विस्तार ने नक्सलियों के पांव उखाड़ने शुरू कर दिए हैं। संगठन के भीतर भरोसे की कमी, भविष्य को लेकर अनिश्चितता, और लगातार हो रही मुठभेड़ भी आत्मसमर्पण की वजह बन रहे हैं।पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, 1 जनवरी 2025 से अब तक 277 माओवादी आत्मसमर्पण कर चुके हैं, जबकि 310 गिरफ्तार हुए और 131 मारे गए हैं।समाज की मुख्यधारा की ओर वापसीबीजापुर एसपी डॉ. जितेन्द्र कुमार यादव ने माओवादियों से अपील की है कि वे हिंसा का रास्ता छोड़कर शासन की पुनर्वास नीति का लाभ लें और सम्मानजनक जीवन की ओर लौटें। उन्होंने कहा कि “सरकार का मकसद केवल कानून व्यवस्था बनाना नहीं, बल्कि हर व्यक्ति को विकास और अवसर से जोड़ना है।”

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