नागपंचमी पर लगता है भव्य मेला, चट्टानों के बीच बसा है रमणीय स्थल

एम सी बी/ चिरमिरी मनेंद्रगढ़ रोड में स्थित साजा पहाड़ के घने जंगलों के बीच ऊँची चट्टानों पर विराजमान श्री हनुमान जी का यह प्राचीन मंदिर आस्था, आभा और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत संगम है। यह मंदिर एमसीबी और चिरमिरी से महज चार किलोमीटर की दूरी पर स्थित है, जिसे स्थानीय लोग श्रद्धा से नागमणि मंदिर के नाम से भी जानते हैं।मंदिर की विशेषता न केवल इसकी प्राकृतिक खूबसूरती में है, बल्कि यह भी मान्यता है कि यहां भगवान श्री हनुमान जी स्वयं साक्षात वास करते हैं। श्रद्धालुओं की मानें तो यहां आने से नकारात्मक ऊर्जा का अंत होता है और मन को विशेष शांति प्राप्त होती है। जब मंदिर प्रांगण में घड़ी व घंटे की आवाज गूंजती है, तो ऐसा प्रतीत होता है मानो समस्त वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से भर गया हो।इस मंदिर परिसर में भगवान हनुमान जी के साथ-साथ भगवान गणेश, भगवान शिव और शेषनाग की प्रतिमाएं भी स्थापित हैं, जिनके दर्शन से भक्तों को विशेष ऊर्जा और आस्था की अनुभूति होती है। चारों ओर हरियाली से घिरा यह स्थल, पहाड़ियों और चट्टानों के बीच एक शांत, रमणीय वातावरण प्रदान करता है।*नागपंचमी पर होता है विशेष आयोजन*हर वर्ष नागपंचमी के पावन अवसर पर यहां भव्य मेले का आयोजन होता है। श्रद्धालु भगवान शिव के मंदिर में नागदेवता को दूध पिलाकर पूजा अर्चना करते हैं और श्री हनुमान जी का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। यह परंपरा लगभग 20 वर्षों से निरंतर चली आ रही है। मेले में दूर-दूर से लोग पहुँचते हैं और भजन-कीर्तन में भाग लेते हैं। वहीं, प्रत्येक मंगलवार को भोग-भंडारा का आयोजन भी भक्तों द्वारा किया जाता है।*रहस्यमयी घटनाओं से जुड़ी है मान्यता*मंदिर से जुड़ी कई रहस्यमयी किंवदंतियां भी प्रचलित हैं। कहा जाता है कि एक बार जब सड़क निर्माण कार्य के दौरान मंदिर को क्षति पहुँचाने की कोशिश हुई, तो जमीन से सैकड़ों विषैले नाग निकलकर मंदिर की सीमा पर बैठ गए। इसके बाद कार्य बंद कर दिया गया और मंदिर सुरक्षित रहा। स्थानीय लोगों का मानना है कि यह चमत्कार भगवान हनुमान जी की ही कृपा थी।स्थानीय निवासी सोहन गुप्ता ने बताया कि एक बार उनकी बाइक जंगल में अचानक बंद हो गई थी और वह घबरा गए थे। तभी उन्हें मंदिर में विराजित श्री हनुमान जी की प्रतिमा दिखाई दी। उन्होंने प्रणाम कर आशीर्वाद लिया और आश्चर्यजनक रूप से बाइक पुनः चालू हो गई। वे सही सलामत अपने घर पहुँचे। उनके अनुसार यह अनुभव आज भी उनके जीवन का सबसे दिव्य क्षण रहा।*प्रकृति और श्रद्धा का अनूठा संगम*साजा पहाड़ स्थित यह मंदिर न सिर्फ धार्मिक दृष्टि से, बल्कि प्राकृतिक सुंदरता के कारण भी क्षेत्र में विशेष पहचान रखता है। यहाँ की वादियाँ, हरियाली, और मंदिर की चट्टानों में उग आए विविध फूल-पौधे इस स्थल को और भी आकर्षक बनाते हैं।श्रद्धा और प्रकृति के इस अलौकिक संगम ने साजा पहाड़ के श्री हनुमान मंदिर को एक प्रमुख धार्मिक स्थल बना दिया है, जहां हर भक्त अपने जीवन की शांति और मनोकामना पूर्ति के लिए जरूर पहुँचता है,हर मंगलवार को भोग भन्डारे प्रसाद वितरण भक्तों के द्वारा किया जाता है।







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