
रायपुर, 12 जून 2025 प्रदेश में कोविड-19 के नए मामलों में अचानक तेजी देखी जा रही है। बुधवार को छत्तीसगढ़ में कोविड के 5 नए मरीज सामने आए हैं, जिनमें रायपुर से 3 और बिलासपुर से 2 मरीज शामिल हैं। इससे पहले 6 मई को एक ही दिन में 17 मरीज सामने आए थे, जो इस माह का सबसे बड़ा आंकड़ा रहा।
अब तक 75 केस, 45 एक्टिव केस
स्वास्थ्य विभाग की जानकारी के अनुसार, अब तक प्रदेश में कुल 75 कोविड केस सामने आ चुके हैं, जिनमें से 30 मरीज स्वस्थ हो चुके हैं और 45 मरीज एक्टिव हैं। इनमें से 41 मरीज होम आइसोलेशन में हैं, 3 को ऑक्सीजन सपोर्ट पर रखा गया है और 1 मरीज रायपुर में ICU में भर्ती है।
डॉक्टरों की राय: ज़्यादातर मरीज घर पर ही ठीक हो रहे
मेकाहारा के डॉ. आर. के. पांडा के अनुसार, अधिकांश मरीज होम क्वारंटाइन में ही ठीक हो रहे हैं, लेकिन डायबिटीज, हृदय रोग, और चेन स्मोकिंग करने वाले मरीजों को विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता है। नया वैरिएंट अपेक्षाकृत कम खतरनाक माना जा रहा है।देशभर में 77 मौतें, नया वैरिएंट JN.1 फैलादेश में अब तक कोविड के 7,154 मरीज नए वैरिएंट JN.1 से संक्रमित हो चुके हैं, जिनमें 77 लोगों की मौत हुई है। हालांकि राहत की बात यह है कि अब तक 6,861 मरीज ठीक हो चुके हैं और फैटेलिटी रेट मात्र 2% दर्ज की गई है।स्वास्थ्य व्यवस्था पर दबाव: ऑक्सीजन प्लांट बंद, सिलेंडर से चल रही सप्लाईकोविड केस बढ़ने के साथ रायपुर के अस्पतालों में ऑक्सीजन सप्लाई को लेकर चिंता गहराने लगी है। DKS, अंबेडकर अस्पताल सहित अन्य केंद्रों पर पीएम केयर फंड से स्थापित ऑक्सीजन प्लांट बंद पड़े हैं। पिछले दो वर्षों में DKS अस्पताल ने सिलेंडर पर करीब 3.84 करोड़ रुपये खर्च किए हैं।DKS डिप्टी सुपरिंटेंडेंट हेमंत के अनुसार, अस्पताल में केवल 900 लीटर/मिनट क्षमता वाला CGMSC का एक प्लांट चालू है, जो केवल 60% ऑक्सीजन की जरूरत पूरी कर पा रहा है। शेष 40% ऑक्सीजन प्राइवेट सिलेंडर से मंगाई जा रही है।अगर केसों में अचानक उछाल आता है, तो सिस्टम मांग पूरी करने की स्थिति में नहीं होगा। ऐसे में मरीजों को 300-400 रुपये प्रति जम्बो सिलेंडर की दर से ऑक्सीजन खुद खरीदनी पड़ सकती है।प्रशासन अलर्ट पर, मॉक ड्रिल और स्टाफ ट्रेनिंग शुरूस्वास्थ्य विभाग ने सभी जिलों में मॉक ड्रिल और ट्रेनिंग शुरू कर दी है। टेक्निकल और नॉन-टेक्निकल स्टाफ को सैंपल कलेक्शन से लेकर मरीज के इलाज तक की ट्रेनिंग दी जा रही है। इमरजेंसी से निपटने के लिए जिला अस्पतालों को निर्देश जारी किए गए हैं।जन-जागरूकता पर जोरमितानिनों के माध्यम से ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में सर्दी-खांसी के मरीजों की पहचान, स्क्रीनिंग और रिपोर्टिंग की जा रही है। जिन मरीजों में ILI और SARI जैसे लक्षण पाए जाते हैं, उनके सैंपल कोविड टेस्ट के लिए भेजे जा रहे हैं। एम्स रायपुर में जीनोम सीक्वेंसिंग के लिए सैंपल भेजे जाने की प्रक्रिया भी शुरू की जा चुकी है।







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