
नई दिल्ली, 11 जून 2025 – अमेरिकी सेनाध्यक्ष ने पाकिस्तान को आतंकवाद-विरोधी प्रयासों में “अद्भुत भागीदार” बताया है। केंद्रीय सेना (CENTCOM) के कमांडर ब्रिगेडियर जनरल माइकल कुरिल्ला ने अमेरिकी हाउस आर्म्ड सर्विसेज कमेटी में यह टिप्पणी की है । उन्होंने कहा कि:
“पाकिस्तान आतंकी गतिविधियों के खिलाफ सक्रिय लड़ाई में शामिल है और आतंकवाद-विरोधी क्षेत्र में वे एक ‘phenomenal partner’ रहे हैं।” en.wikipedia.org+9telegraphindia.com+9timesofindia.indiatimes.com+9
कांग्रेस ने इस बयान को भारत के लिए बड़ा कूटनीतिक झटका बताया और प्रधानमंत्री मोदी से मांग की कि वे स्पष्ट करें कि क्या यह छुटपुट सफलता से अधिक भारत के वैश्विक राजनयिक प्रभाव को कमजोर करता है?
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने भी इस सिलसिले में सवाल उठाए। उन्होंने इस्ताना किया कि पाकिस्तान के उसके पहले सेना प्रमुख से मिल रहे हैं, मंगलवार को ही एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार पाकिस्तान के आर्मी चीफ जनरल आसिम मुनिर को 14 जून को अमेरिकी आर्मी डे समारोह में आमंत्रित किया गया है । रमेश ने पूछा:
“मुनीर ने हाल ही में पलहगाम हमले से पहले जो भाषण दिए, वे भड़काऊ थे। अब अमेरिकी उन्हें आमंत्रित कर रहे हैं — यह भारत के लिए एक और बड़ा कूटनीतिक झटका क्यों नहीं?” deccanherald.com
विरोध में कांग्रेस ने मोदी सरकार पर हमला किया कि इसकी विदेश नीति बहुपक्षीय होने की बजाय कमजोर पड़ रही है। पार्टी ने पालाग़ाम आतंकी हमले के बाद शुरू की गई ‘ऑपरेशन सिंदूर’ जैसी पहलों को भी इस कथन की पृष्ठभूमि में अकेली कूटनीतिक सफलता नहीं मानने का आह्वान किया ।
🔍 विश्लेषणित सारांश:
उत्तरी अमेरिकी दृष्टिकोण: CENTCOM के कमांडर ने स्पष्ट किया कि अमेरिका पाकिस्तान को आतंकवाद से लड़ने में एक महत्वपूर्ण सहयोगी मानता है, और साथ ही भारत से रिश्ते को भी महत्व देता है। इस दृष्टिकोण से, यह एक ‘द्विध्रुवीय’ रणनीति है — जहां पाकिस्तान और भारत दोनों को साथ लेकर चलना जरूरी है।
भ्रष्टाचार की राजनीति: कांग्रेस इसे मोदी सरकार की कमी बताते हुए कह रही है कि भारत ने अपनी कूटनीतिक पहल के बावजूद इस तरह के बयान से विश्व स्तर पर अपना असर कमजोर किया है।
भविष्य की संभावनाएँ: आने वाले दिनों में पाकिस्तान के सेना प्रमुख का अमेरिका दौरा होना है, और इससे भारत की विदेश नीति एवं रक्षा संबंधों पर नए सवाल उठ सकते हैं।
🗓️ अब आगे क्या होगा?
मोदी सरकार को स्थिति पर स्पष्टता देनी होगी और यह बताना होगा कि संयुक्त राज्य के साथ भारत-पाकिस्तान दृष्टिकोण को कैसे संतुलित किया जाएगा।
कूटनीतिक मोर्चे पर भारत को दिखाना होगा कि उसकी विश्वस्तरीय हैसियत इस तरह की टिप्पणियों से प्रभावित नहीं हुई है।








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