संभवत हर कोई शास्त्री जी के जीवन संघर्ष से परिचित होगा। उनके राष्ट्रप्रेम का लोहा सारा देश मानता है, पर इसके ऊपर उठकर कोई नहीं जानना चाहता के भविष्य में उनके कार्य को केवल समझना या जानना ही जरूरी नहीं, अपितु उस कार्य का हिस्सा बनकर, उसमें शामिल होकर सही मायने में उन्हें जन्मदिन की भेंट दी जाएं। कुछ किस्से कहानियों को लिखकर हम समझ बैठते हैं, के हमें देशभक्तों के कार्य की जानकारी है, पर अब केवल कलम उठाने की नहीं उसे तलवार बनाकर लोगों के दिलों में नए भारत की परिपूर्ण तस्वीर साकार करने की जरूरत है।
हमें गांधी, शास्त्री जैसे महान विभूतियों से प्रेरणा लेने की और उनके बताए मार्ग पर चलने की कसम खानी चाहिए। परतंत्र भारत मे विदेशी दुश्मनों का साम्राज्य था। वे देश को लुटते रहे। कई वीर शहीदों ने अपने शहादत से देश को आजाद किया। आज हम आजाद हैं, पर क्या हम सचमुच आज़ाद है? शास्त्री जी ने जय जवान जय किसान का नारा दिया था। देश की युवा पीढ़ी और किसान के हाथों देश की बागडोर सौंपने की बात कही थी। आज दृश्य विपरीत है, देश का किसान गरीबी का जहर पीकर मर रहा है, और जवान दुर्व्यसन का आदी होकर देश को खोखला कर रहा है। हमने गैरो से तो देश को बचा लिया, पर अपनों का क्या?
क्या हम सचमुच अपनों से ही हार जाते है? आजाद देश के नागरिक के नाते क्या हमें यह अधिकार नहीं के गुनहगार को उचित सज़ा दी जाएं। आओ आज इन दो महान विभूतियों के जन्म दिवस पर उन्हें सही मायने में श्रद्धा सुमन अर्पित करते हैं, और संकल्प करते हैं इस देश को गांधी शास्त्री का देश बनाए।

कीर्ति शर्मा






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