
छत्तीसगढ में मरवाही उप चुनाव की जंग अब तेज होने लगी है।दंगल पूरी तरह से सजने संवरने लगा है।बस पहलवानों का मैदान नें उतरना बाकी है। जिसका चयन भी जल्द हो जायेगा।फिलहाल तो दल ही ताल ठोकने में लगे हैं।
मरवाही उप चुनाव के लिये तारीख कि घोषणा के साथ ही चुनावी सरगर्मियां भी तेज होने लगी है।चुनाव 3 नवम्बर को होंगे जिसके लिये विभिन्न दल अपने अपने समीकरण तैयार करने में न केवल जुट गये हैं वरन दांव पेंच को धार देने में लगे हैं ।मुकाबला दो राष्ट्रीय दल कांग्रेस और भाजपा तथा जनता कांग्रेस छत्तीसगढ के मध्य होगा यह अभी से साफ है।इस “त्रिकोणीय संघर्ष” में तीनों दलों की अपनी तैयारियां जोर शोर से करने के साथ अपनी जीत के दावे भी है।दो दल कांग्रेस भाजपा में प्रत्याशी चयन की प्रक्रिया चल रही है तो जनता कांग्रेस से अमित जोगी का लड़ना लगभग तय माना जा रहा है।
“मरवाही” करीब दो लाख मतदाता वाली अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित सीट है .राज्य बनने के बाद यहाँ हुए पांच चुनावों में जोगी परिवार ही जीतता आया है.यहाँ जोगी परिवार की व्यक्तिगत पकड़ और दखल रही है।कांग्रेस विकास को मुद्दे को अहमियत दे रही है।यह संदेश भी कि कद्दावर नेता को चुनने को बाद भी इलाका पिछड़ा रहा।गौरेला पेंड्रा मरवाही को नया जिला बना दिया।साथ ही नवगठित जिले को 332 करोड़ रुपये के विकास कार्यों कि सौगात भी दी गई।गौरेला व पेंड्रा को नगर पालिका बनाने का भी एलान हुआ है।
यहाँ 1977 तथा 80 में हुए चुनाव नें कांग्रेस के डॉ भंवर सिंह पोर्ते जीते थे तो 85 में कांग्रेस के दीनदयाल पोर्ते।90 का चुनाव डॉ भंवर सिंह पोर्ते ने भाजपा से जीता।93 में कांग्रेस के पहलवान सिंह मरावी तो 98 में भाजपा के रामदयाल उइके जीते।2001में नया राज्य छत्तीसगढ़ बना . अजीत जोगी मुख्यमंत्री बने तो मरवाही सीट उईके से रिक्त करा कर उप चुनाव जीत कर विधायक बने।फिर2003 व 08 का चुनाव भी यहाँ से जीता। 2013 में कांग्रेस से अमित जोगी जीते।2016 में अजीत जोगी ने नई पार्टी जनता कांग्रेस छत्तीसगढ बनाई और 18 में मरवाही से विधायक बने।
बहरहाल यहाँ के तिकोने संघर्ष में शतरंज की बिसात बिछ चुकी है। और चालें चली जा रहीं हैं।जीत किसकी होगी ये वक्त ही बतायेगा।






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