धरा हमारी धन्य हो गई
युगाधार बन आये बापू।
धीर,वीर, गम्भीर रहे नित
तप-प्रतिमा कहलाए बापू।।
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मानवता के तपोमूर्ति थे
सत्य-अहिंसा के थे साधक।
पीड़ित जन के ताप हरे नित
औ थे राम नाम आराधक।।
मानवता के नित प्रहरी बन
महासेतु बन आये बापू।।
धरा हमारी,,,,,,,,,,,,,,,,,,
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रामराज्य की धरे कल्पना
संयम-तप के बने पुजारी।
व्रत,सेवा औ भक्तिभावना
प्रेम ,अहिंसा के व्रत धारी।।
शंख यहाँ फूँके युगनायक
युग-दर्पण दिखलाए बापू।।
धरा हमारी,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
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समता के थे नित संदेशक
चरखा-तकली ही प्यारे थे।
बने प्रकाश-पथिक जगती के
साधक थे वे उजियारे थे।।
क्षमा,दया,सेवा भावों से
सबके मन को भाए बापू।।
धरा हमारी,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
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खादी की धोती औ लाठी
हिन्दुस्तान हृदय में धारे
धूल चटाया फिरंगियों को
भारत माँ को वही उबारे।।
उच्च विचारों को लेकर ही
सबके हृद में छाए बापू।।
धरा हमारी,,,,,,,,,,,,,,,,
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मधुलिका दुबे,मधु






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