गांधी जयंती पर विशेष मुरली दास संत का यह आलेख-

हिंसक व्यक्ति एवं नशे से चूर व्यक्ति को भी गांधी के तरीके से संत बनाया जा सकता है …

उन्नीस सौ सत्तर 71,,72 में चंबल घाटी डाकुओं के नाम से प्रख्यात था बिगड़ अंचलों में शाम के 4:00 बजे के बाद घर से निकलना दूर की बात आप कल्पना भी नहीं कर सकते आपको कब डाकू उठाकर ले जाए मानव सभ्यता पर यह बहुत बड़ा कलंक चंबल घाटी ऊपर और चंबल के चित्र पर रहने वाले साथियों पर लगा हुआ था… बात-बात पर गोली चलना आम बात हो गया था। लेकिन प्रख्यात गांधीवादी डॉक्टर एसएन सुबाराव जी और उनका शिष्य आदरणीय पीवी राजगोपाल के कुशल नेतृत्व में गांधियन तरीके से 572 बागियों को बंदूक सहित डाकुओं को आत्मसमर्पण करने की ऐतिहासिक सफलता प्राप्त की। आज भी उन को समर्पित साथियों के द्वारा आज महत्वपूर्ण समाज के विकास में अपना योगदान प्रदान कर रहे हैं। आप जरा महात्मा गांधी सेवा आश्रम में आकर देख सकते हैं डाकू मलखान सिंह डाकू मोहर सिंह जो अपने नाम से ही जाने जाते थे। आज समाज के मुख्यधारा में जुड़कर समाज को नई दिशा देने का और समाज परिवर्तन की बात कर रहे हैं यह गांधीवादी तरीका ही था जो इतने खूंखार डाकूओं को आत्मसमर्पण करने के लिए मजबूर कर दिया।

मैं आप लोगों को बताना चाहता हूं। पहले हम मध्य प्रदेश में रहा करते थे। जिसका बिलासपुर जिला के अंतर्गत ग्राम पंचायत जलके के आश्रित ग्राम तेंदू टिकरा जहां पर विशेष पिछड़ी जनजाति पंडो समाज के लोग निवासरत थे। पहले इनकी दिनचर्या शराब पीना शिकार करना आपस में लड़ना और कभी नशे में चूर रहने की आदत पड़ चुकी थी। 1990 के अंडे में एकता परिषद के आदरणीय राज गोपाल जी के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में वंचित समाज को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए वृहद रूप से गांधीजी के सिद्धांत पर चलने की प्रेरणा लेकर अलग-अलग गांव में इन बिखरे हुए समाजों को जो नशे में चूर थे। उनको बटोरने के लिए उनकी आत्मा निर्भर को जगाने के लिए और आत्म सम्मान के लिए महत्वपूर्ण प्रयास एकता परिषद के द्वारा किया गया इसी का परिणाम रहा आज जो इस समाज के लोग कभी नशे में चूर होते थे आज आत्मनिर्भर हैं। आत्मा स्वावलंबन है और ग्राम में गांधीजी के महत्वपूर्ण कुटी गांधी कोटि का निर्माण गांव के बीचो-बीच कर गांव को स्वालंबन ग्राम स्वराज की बात सर्वोदय की बात कर रहे हैं पहले गांव में सुधारों के द्वारा इन लोगों को ब्याज में रकम देते थे आज गांव की महिलाएं ग्रामीण अपने स्वयं के अनाज को ग्राम कोष के माध्यम से अपने गांव में विभिन्न प्रकार की रचनात्मक कार्य कर स्वालंबन की ओर अग्रसर हो गए हैं आज तेंदू टिकरा गांव में स्वयं के प्रेरणा से श्रमदान से तीन कुआं दो तालाब गांव में बिजली सड़क शासन की महत्वपूर्ण योजनाएं सभी का शत प्रतिशत लाभ ले रहे हैं यह गांधी विनोबा जी का ही परिणाम है जिसके बदौलत आज दूर आंचल वनांचल गांव को गांधीजी केछ सिद्धांत के अनुरूप ग्राम स्वराज और स्वालंबन की ओर अग्रसर कर पाए। इस गांव में विगत 19 साल से पूर्ण रूप से शराब बंदी है ना कोई शराब बनाते ना कोई शराब बेचते ना कोई शराब पीते। हम इसे जनजाति गांव को गांधीजी विनोबा जी के सपनों का गांव कह सकते हैं इन महापुरुषों ने ऐसे गांव की कल्पना की थी ग्रामीण शराब छोड़ कर खेती कर रहे हैं अब उनकी सोच बदल गई है ग्रामीण अपने मेहनत से गांव में कुआं और तालाब का निर्माण कर लिए हैं टीवी और मोबाइल का भी प्रोग्राम हुआ पहले गांव में कोई टीवी मोबाइल नहीं हुआ करता था कच्ची सड़क थी जबसे आधुनिकता की दौड़ शुरू हुआ है तब से गांव वाले युवा साथियों ने भी मोबाइल एवं टीवी का शौक इस कदर हावी हो गया कि अब वहीं से बैठकर के 108 ,112 सभी सरकार की योजनाओं का मोबाइल के माध्यम से कृषि यंत्र का काम जैविक खाद का उपयोग महिला और छोटे बच्चे टीवी देखना पसंद कर रहे हैं यह सभी काम एकता परिषद के निरंतर संपर्क एवं उनसे संवाद कर गांधीजी के मूलभूत सिद्धांतों को अवगत कराकर और आदरणीय पीवी राजगोपाल जी के सतत मार्गदर्शन से यह काम कर पाए । यह गांव विकासखंड पोड़ी उपरोड़ा के अंतर्गत आता है आज सभी पास वनाधिकार अधिनियम के तहत जमीन है सभी के लिए पर्याप्त पानी है सभी गाय बैल भैंस के लिए पर्याप्त लाभ है सिंचाई करने के लिए और अपने साक्षी उत्पादन के लिए कुआं का भी निर्माण कर चुके हैं अपने बचत पैसे से अपने गांव के लोगों को एक दूसरे के सहयोग की भावना रखकर आपसी सामंजस्य बनाकर काम कर रहे हैं यही तो ग्राम स्वराज है आइए इनका हौसला बढ़ाते हुए हम 2 अक्टूबर के सभी को पूज्य बापू जी की सत्य अहिंसा पर चलने की प्रेरणा देते हुए सभी गांव को शराब मुक्त वह नशा मुक्त करने की प्रेरणा लें ताकि हमारे आने वाले पीढ़ी हमारे पूज्य बापूजी को जाने उनके मार्गदर्शन पर चले सत्य अहिंसा के रास्ते को अपनाएं।

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