
आज ही के दिन राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री इस धरती पर जन्म लिए इन दोनो महान विभूतियों ने भारत को विश्वपटल पर एक नई पहचान दिलाई। इस दिन को हम सभी अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस के रूप में भी मनाते हैं । दोस्त सादा जीवन और उच्च विचार के बलबूते इन महान विभूतियों ने देश का मान सम्मान बढ़ाया। इन्होंने दुनिया को यह बता दिया कि अगर इंसान के अंदर आत्मविश्वास हो तो वह कुछ भी हासिल कर सकता है।
प्रत्येक वर्ष हम सभी 2 अक्टूबर को इन दोनों महान विभूतियों के जयंती को पूरे हर्षोल्लास से मनाते हैं, फिर हम सब मिलकर राष्ट्रपिता और शास्त्री जी को याद करने का ढोंग करते हैं ना कि उनके विचारों और संस्कारों को अपनाकर विश्व कल्याण के लिए कदम बढ़ाते हैं। ऐसा ही दोस्त एक ढोंग पिछले वर्षों में भी गांधी जयंती पर स्वच्छता मिशन के नाम पर किया गया। आप ही निष्पक्ष आकलन करके बताइए कि आज कितना कामयाब है यह मिशन? अधिकतर झूठे कूड़ा करकट साफ करके फोटो खिंचवाने और समाचार प्रकाशित करवाने तक ही क्या सिमट नहीं गया है ?
दूसरी तरफ आप ही देखो दोस्त जिस भारत का सपना हमारे राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने देखा था उस सपने को आज हमारे नीति निर्माताओं ने भारी भरकम फाइलों के नीचे दबा नहीं दिया है। आज देश में अत्याचार और भ्रष्टाचार हर जगह सर पर चढ़कर बोल रहा है। जिस प्रकार से आज महिलाओं के साथ अन्याय हो रहा है क्या इसी भारत का सपना हमारे महात्मा गांधी और शास्त्री जी ने देखा था ? हम देख रहे हैं कि आज एक तरफ जहां अपराधियों को बचाने के लिए सरकार में बैठे लोग हर दांवपेच लगा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ घोटाले करने वालों दागियों को बचाने के लिए कानून और अध्यादेश भी लाए जा रहे हैं। दागियों को बचाने के लिए आज गवाहों को ही मार दिया जा रहा है। ध्यान से देखें तो भ्रष्टाचार समाप्ति का दावा करके सत्ता में आए सत्ताधीसो के कानों में जूं तक नहीं रेंग रही है। दोस्त आजादी के दौरान जिस व्यवस्था को संविधान के नीति निर्माताओं ने बनाया था आज उसको तोड़ मरोड़कर दोषी बनाया जा रहा है। आज लोकतंत्र के रखवाले लोकतंत्र का गला दबा रहे हैं। यह आप भी देख रहे हैं कि राजनीतिक उठापटक के कारण देश में आज महिलाओं के साथ अत्याचार, अराजकता, दंगे ,भ्रष्टाचार, कन्या भ्रूण हत्या हमारे समाज में आज भी बरकरार है, जो कि यह बताने के लिए काफी है कि गांधी और शास्त्री के सपने को हमने पूरा नहीं कर पाया। जैसा कि हम जानते हैं कि दोस्त राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और शास्त्री जी ने राजनीति को सेवा का माध्यम बनाया था, लेकिन आज दंगों, अपराधों, हथियारों और बारूद के अनाधिकृत प्रयोग के मास्टरमाइंड राजनीति में अहम भूमिका निभा रहे हैं, राजनीतिक दल वालों ने तो आज इनको संरक्षण दे रखा है। लेकिन दोस्त महात्मा गांधी और शास्त्री जी ने जिस स्वस्थ और स्वच्छ समाज की कल्पना किए थे वह आज हिंसा, घृणा, भ्रष्टाचार, असहिष्णुता ने जगह बना लिया है। आप ही देखो ना आज राजनीतिक फायदा के लिए मानवता का ही लहू बहाया जा रहा है। दो समूहों में राजनीतिक दल दंगा करा कर अपने भविष्य को सुरक्षित कर ले रहे हैं।
आज राजनीति अपराध का अड्डा बनती जा रही है जिसकी वजह से लोगों का राजनीति और राजनेताओं पर से भरोसा उठता जा रहा है, इस भरोसे को कायम करने के लिए हमें साफ और स्वच्छ राजनीति को बनाना ही होगा।
दोस्त भारतीय मुद्रा पर गांधीजी तो सबको चाहिए लेकिन मूल जीवन में गांधी जी के बताए रास्ते पर चलना तो दूर लोग गांधीजी की परछाई से भी दूर रहना पसंद करते हैं।
आज आप ही देखो ना गांधी जी के मूल्यों पर चलने का जोखिम युवा वर्ग भी लेना ही नहीं चाहता। गर्म-मिज़ाज और अधिकारों के आगे कर्तव्यों को भूल जाने वाला युवा वर्ग किसी भी कीमत पर अहिंसा के मार्ग पर नहीं चलता । आज एक गाल पर थप्पड़ पड़ने पर दूसरा गाल आगे करने वालों की जगह ईंट का जवाब पत्थर से देने वालों की संख्या कहीं अधिक है। दोस्त गांधी और शास्त्री जी के जयंती पर इन दोनों महान विभूतियों को याद करना तो सभी के लिए आसान सा काम है। 2 मिनट उनका नाम लिया और याद कर लिया, स्वतंत्रता आंदोलन के सबसे बड़े योद्धा जिसने बिना हिंसा किए देश को आजादी दिलाई। लेकिन क्या हम उनकी शिक्षा पर भी आज अमल कर सकते हैं?
आज ही के दिन देश के महान सपूत लाल बहादुर शास्त्री जी भी इस धरती पर जन्म लिए, इनका भी जयंती हम मना रहे हैं। शास्त्री जी हमेशा अपनी ऊर्जा देश के समग्र विकास में लगाई। हम किसानों के लिए जय जवान जय किसान का नारा देकर किसान और जवान की हौसला बढ़ाया। शास्त्री जी किसानों की उपज बढ़ाने के लिए प्रचूर अवसर प्रदान करने के लिए ईमानदारी से कार्य किए वही शास्त्री जी को अपने देश के जवानों पर पूरा भरोसा था। लेकिन दोस्त आज भी हमारा किसान और जवान दोनों परेशान हैं सुखी है हमारे देश में तो सिर्फ और सिर्फ धनवान। आज जनप्रतिनिधि सिर्फ नाम के जनता के प्रतिनिधि रह गए, वास्तव में हम देखें तो नेताजी लोग आज धनवान और पूंजीपतियों के प्रतिनिधि हैं। आए दिन हम सब देखते हैं कि हमारे अन्नदाता फंदे पर लटककर अपनी जान देते हैं तो देश का नौजवान सीमा पर गोली खाकर जान देता है। हमारे किसान मजदूर और मध्यमवर्गीय परिवारों के बच्चे ही सेना में अधिकतर जाते हैं आपने कभी देखा है किसी मंत्री , सांसद ब्यूरोक्रेट्स विधायक या किसी कॉर्पोरेट घराने के बच्चे बॉर्डर पर लड़ने जाते हैं नहीं दोस्तों वहां गरीब किसान मजदूर और मध्यम वर्ग के बच्चे ही होते हैं। इसीलिए दोस्त नेता जी लोग आएंगे और श्रद्धांजलि देंगे और चले जाएंगे, जिस दिन मंत्री सांसद ब्यूरोक्रेट्स विधायक कॉर्पोरेट घराने से भी बच्चे जाने लगेंगे तो देखना कितना कितना बदलाव होगा हमारे देश में लेकिन ऐसा कानून आखिर कब बनेगा जब सभी को बराबर का अधिकार मिले जैसा कि अनुच्छेद 14 में लिखा गया है कि संविधान के नज़रों में सब बराबर है ? जब सब बराबर है तो देश के हर वर्ग के बच्चों को सेना में जाकर कम से कम 1 वर्षों का तो सेवा देना ही चाहिए।
आज दोस्त मेरे साथ आप प्रण लो की व्यक्तिगत तौर पर हमसे जितना संभव हो सकेगा हम अपने जीवन में गांधी जी और शास्त्री जी के मूल्यों को लाने का प्रयास करेंगे।तभी दोस्तों देश में शांति और समृद्धि आएगी।
एक बार राष्ट्रपिता महात्मा गांधी से पूछा गया था कि भगवान क्या है? उनका जवाब था दोस्त सच ही भगवान है। आप सोचो दोस्त काश हम उनकी सिर्फ इसी सीख पर इमानदारी से अपने जीवन में अमल कर ले तो मुझे लगता है कि यही सच्ची श्रद्धांजलि होगी इन महान आत्मा के प्रति जिसे हम प्यार से बापू भी कहते हैं।
शास्त्री जी जो कि दिल और आत्मा से ईमानदार थे, जिनके कर्म और वचन में कोई भी अंतर नहीं था। इस भारत के महान सपूत,इस छोटे कद के महान व्यक्तित्व को उसकी जयंती पर हार्दिक आदरांजली और श्रद्धांजलि यही होगी कि दोस्त हम किसानों और जवानों को उनका जायज हक और सम्मान दिया जाए। गांधीजी और शास्त्री जी के ऐतिहासिक घटनाओं पर आज हम नजर नहीं डाल पाएंगे समय के अभाव के कारण लेकिन आप जरूर इन दोनों महान विभूतियों के ऐतिहासिक घटनाओं को भी पढ़ें और इसके साथ ही अपने जीवन में भी आत्मसात करें।।
विक्रम चौरसिया