ग़म की ऐसी दवा कीजिए।
कुछ तो खुल कर हँसा कीजिए।
खुश हो जाए ज़माना ज़रा,
खुशहाली की दुआ कीजिए।
उनके सुख को खुदाई समझ,
ऐसी सजदा अदा कीजिए।
मिलने से खुश हुए हैं सभी,
यूँ ही आकर मिला कीजिए।
कोई मंज़िल मिलेगी तभी,
मन में जब फैसला कीजिए।
रब तो दिल में बसे हैं ‘श्रवण’
दिल से उल्फ़त अता कीजिए।
*श्रवण चोरनेले 'श्रवण'*
रायपुर (छत्तीसगढ़)








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