शहीदे आज़म जन्में
सत्ताईस सितंबर,
सन उन्नीस सौ सात l
शहीदे आज़म जन्में,
करने नवल प्रभात l
कोख से विद्यावती के
सरदार किशन सिंह के घर l
बंगा की धरती में,
खेले विलक्षण तन धर l
लाजपत राय के विचारों,
को करके आत्मसात l
शहीदेआज़म..
संहार जालियाँवाला का,
और बहती खून की नदियां l
भर आयी थी भगत सिंह,
की देख के दोनों अँखियाँ l
तब जाके दिए सैंडर्स को
मौत की सौगात l
शहीदेआज़म..

आज़ाद के संग मिलके,
खूब दुश्मन को नचाया l
कैसे निपटें दोनों से,
उन्हें कुछ समझ न आया l
लगने लगा पतन की,
अब हो गयी शुरुआत l
शहीदेआज़म..
थे अच्छे वक्ता, पाठक,
बेजोड़ लेखक भी थे l
लिखा कई पत्रिका मे,
सम्पादन भी करते थे l
और कितने हुनर थे,
कर पाऊँगा न ज्ञात l
शहीदेआज़म..
लाहौर षड्यंत्र में,
सुखदेव, राजगुरु के संग l
पाके फांसी की सज़ा,
खिला और चेहरे में रंग l
हँसते हँसते मिटे वो,
कर देश के नाम ये गात l
शहीदेआज़म..
प्रभात कटगीहा
कटगी







Comments are closed.