जानें मौसम का लेटेस्ट अपडेट…, अगले दो महीने दिखेगा ला नीना का असर! अक्टूबर तक भारी बारिश,फिर बंपर ठंड

नईदिल्ली/ आने वाले दिनों में मौसम बदलने वाला है. मौसम विभाग ने अक्टूबर महीने तक बारिश होने की संभावना व्यक्त की है और उसके बाद भयंकर सर्दी पड़ने का अनुमान भी लगाया है. आमतौर पर मानसून के मौसम के आखिरी में होने वाली ला नीना तापमान में तेजी से गिरावट लाने के लिए जानी जाती है. इसके साथ अक्सर बारिश भी बढ़ जाती है इसके बाद आगे भयंकर सर्दी की संभावना बढ़ जाती है.

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने सितंबर में बारिश की भविष्यवाणी की है और उत्तर भारत के कई हिस्सों में भारी बारिश होने का अनुमान है. भारत में ला नीना के कारण भीषण सर्दी पड़ने की संभावना है, जिससे तापमान में भारी गिरावट और अधिक बारिश की संभावना है, जो मानसून ऋतु के अंत में एक महत्वपूर्ण जलवायु परिवर्तन का संकेत है.

भारत में मानसून अक्सर 15 अक्टूबर तक खत्म हो जाता है लेकिन इस बार ला नीना की वजह से यह काफी लेट हो सकता है. इसका असर अक्टूबर के आखिरी में दक्षिण भारत में आने वाले उत्तर पूर्वी मानसून पर भी पड़ सकता है.आईएमडी के महानिदेशक मृत्युंजय महापात्रा ने कहा कि हालांकि सितंबर में मानसून के वापस लौटने की उम्मीद है, लेकिन ला नीना के प्रभाव से बंगाल की खाड़ी में जोरदार “चक्रवाती गतिविधि” होने की संभावना है और इसके परिणामस्वरूप महीने के अधिकांश समय में बारिश की कई घटनाएं हो सकती हैं.

उन्होंने कहा कि सितंबर में मानसून की बारिश महीने के लिए सामान्य से 9% अधिक (16.8 सेमी) होने की उम्मीद है. आईएमडी के पूर्वानुमान मुताबिक, राजस्थान, उत्तराखंड और दिल्ली के कई हिस्सों में भारी बारिश होने की संभावना है. डॉ. महापात्रा ने कहा, “मानसून की वापसी आमतौर पर सितंबर के बीच तक शुरू हो जाती है, लेकिन भारी बारिश की उम्मीद के साथ, अभी इसका पूर्वानुमान लगाना जल्दबाजी होगी.”

ला नीना, जिसका स्पेनिश में मीनिंग है ‘लड़की’ जो एल नीनो का जलवायु प्रतिरूप है और दोनों घटनाएं बिल्कुल विपरीत व्यवहार करती हैं.ला नीना घटना के दौरान, तेज़ पूर्वी हवाएं समुद्र के पानी को पश्चिम की ओर धकेलती हैं, जिससे समुद्र की सतह ठंडी हो जाती है, विशेष रूप से भूमध्यरेखीय प्रशांत क्षेत्र में.ला नीना और अल नीनो दोनों ही महत्वपूर्ण समुद्री और वायुमंडलीय घटनाएं हैं जो आम तौर पर अप्रैल और जून के बीच शुरू होती हैं और अक्टूबर और फरवरी के बीच प्रबल होती हैं. ये घटनाएं आम तौर पर 9 से 12 महीनों तक चलती हैं लेकिन कभी-कभी दो साल तक भी जारी रह सकती हैं.

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