आजादी के खातिर घर द्वार छोड़ गया वह दीवाना।
अंग्रेजों को गोली मारने का ताना सीधा निशाना।।
हंसता रहा तेईस मार्च को यह मर्दाना सरदार ।
फांसी को मान गले का हार, सहर्ष किया स्वीकार।।

दिया संदेश नौजवानों को नहीं मानना हार।
धड़ से सिर अलग करना है , तैय्यार रखो तलवार।।
भगत गा रहा था , हम पहन चले बसंती चोला।
जिसे पहन वीर शिवा ने माँ का बंधन खोला।।
मातृभूमि पर प्राण त्याग दिये, तीन पावन लाल।
सुखदेव ,राजगुरु और भगत ने, कर दिए कमाल।।।
नमन करें उनकी बलिदानी को , भारत के सभी जन ।
आजाद ने आजाद है कराया गुलामी का घुटन।।
इतिहास के पन्नों पर नाम कर गया अमर।
अंग्रेजों को धूल चटाया ऐसा था वीर भगत का जिगर।।
राजेश मिश्रा
कोरबा (छतीसगढ़)






Comments are closed.