
कपल चैलेंज आजकल फेसबुक पर छाया हुआ है।दनादन लोग अपनी बढ़िया-बढ़िया तस्वीरें,अपने पति या पत्नी के साथ डाल रहे हैं और लिख रहे हैं चैलेंज एक्सेप्टेड,गोया बहुत बड़ा कार्य कर लिया हो। वैसे तो डिजिटल युग में कोरोनावायरस के संकट के समय अच्छे दिनों को याद करना और संकट के समय पॉजिटिव बने रहनाअच्छी बात है ।फेसबुक पर दी गई सूचना के अनुसार लगभग बीस लाख से अधिक लोग इस चैलेंज को स्वीकार करके अपनी फोटो डाल चुके हैं।पर अपने जीवन साथी के साथ रहने मे चैलेंज जैसा क्या? यह तो एक सहज प्रक्रिया है जिसका हम सब निर्वाह कर रहे हैं।वह मजदूर भी निर्वाह कर रहा है जिसको लॉकडाउन में अपने बीवी बच्चों के साथ मीलों पैदल चल कर घर वापस जाना पड़ा था। वह बेरोजगार भी कर रहे हैं जिनकी नौकरियां चली गई हैं।
तमाम वह लोग भी कर रहे हैं जो बेहद कम कर दी गई सैलरी पर काम करने के लिए विवश हैं।वह लोग भी कर रहे हैं जिनके काम धंधे बंद हो गए हैं। वह भी कर रहे हैं जिनके परिजन कोविड-19 की भेंट चढ़ गए और वह भी जिनको अस्पतालों में इलाज नहीं मिल पा रहा है। परंतु हम जैसे बहुत से लोगों के जीवन में शायद कोई खास चैलेंज नहीं है। देश और दुनिया के सम्मुख उपस्थित चैलेंज से हमारे संबंध पहले से ही कम होते जा रहे हैं।शायद इसलिए हम इन बनावटी चैलेंजों को एक्सेप्ट करते हैं। किसानों और श्रमिकों के सामने आने वाले चैलेंज की बजाय हम फेसबुक द्वारा समय समय पर प्रायोजित काल्पनिक चैलेंज मे व्यस्त हो जाते हैं।
नाराज ना होइएगा इसी प्रक्रिया में मैं चैलेंज स्वीकार करते हुए आज बा और बापू की तस्वीर लगा रहा हूं।
राकेश श्रीवास्तव,
लखनऊ






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