
कोरबा/ हिंदी के आधुनिक युगांतर कवि गजानन माधव मुक्तिबोध की 59वीं पुण्यतिथि पर आज प्रगतिशील लेखक संघ कोरबा इकाई ने एक संगोष्ठी और श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया। जिसमें मुख्य वक्ता के रूप में प्रगतिशील लेखक संघ के पूर्व अध्यक्ष साहित्यकार लोक बाबू ने अपने संबोधन में कहा कि गजानन माधव मुक्तिबोध की कविताएं बहुत ही जटिल हैं मगर लोक हितकारी हैं।
उन्होंने अपने वक्तव्य में कहा कि अगर मुक्तिबोध ने अपनी कविताओं को हिंदी की जगह अंग्रेजी में लिखा होता तो उन्हें अनिवार्य रूप से नोबेल सम्मान प्राप्त होता। उन्होंने मुक्तिबोध के संदर्भ में अपने लंबे वक्तव्य में कहा कि गजानंद माधव मुक्तिबोध एक सिद्धांतरकारी लेखक थे जिन्होंने एक कार्यक्रम में द्वारका प्रसाद मिश्र जैसे विद्वान जो बाद में अविभाजित मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री बनने के एक कार्यक्रम में मंच पर बैठने से इसलिए इनकार कर दिया क्योंकि सवाल विचारधारा का था और उन्होंने द्वारका प्रसाद मिश्र से इस बात का खुलासा करते हुए स्पष्ट रूप से अपने विचारधारा का उल्लेख भी किया ऐसे शीर्षस्थ साहित्यकार मुक्तिबोध के साहित्य का आज जन-जन तक प्रचार-प्रसार हो रहा है जो हिंदी के अप्रतिम और जीवंत कवि है।
प्रगतिशील लेखक संघ के पूर्व अध्यक्ष वरिष्ठ साहित्यकार युनूस दनियाल पूरी ने कहा – मुक्तिबोध हिंदी के एक बड़े महत्वपूर्ण कवि है जिनकी असंख्य ऐसी महत्वपूर्ण कविताएं हैं जो समाज को बदलने का माद्दा रखती है उनकी ब्रह्मराक्षस, अंधेरे में जैसी कविताएं तो कालजई रचनाएं हैं। सुरेशचंद्र रोहरा ने इस अवसर पर कवि को श्रद्धांजलि देते हुए उनकी कविता को याद किया जिसे उन्होंने अपने 30 साल पहले लिखे गए उपन्यास काले धब्बे में जिक्र किया है । श्रद्धांजलि सभा में कवियत्री गार्गी चटर्जी, कमल सर विद्या, सनंद दास दीवान, शिवशंकर अग्रवाल, समीर चटर्जी आदि ने शिरकत कर कवि मुक्तिबोध को उनकी पुण्यतिथि पर याद किया और श्रद्धांजलि अर्पित की।









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