
अमीजी,इतनी जल्दी क्या थी अलविदा कहने की। सबको साहस का पाढ पढाने वाला खुद चला गया।
अभी पिछले वर्ष ही तो उनके नेतृत्व में पहली बार “आगरा साहित्य उत्सव और राष्ट्रीय पुस्तक मेला 2019” का सफल आयोजन हुआ जो उनकी सोच,दूरदृष्टि और सांगठनिक क्षमता का परिणाम था। उन्होंने इसको साहित्य उत्सव बनाकर एक नया आयाम दिया।
शांत और गम्भीर व्यक्तित्व के धनी सब को साथ लेकर चलने वाले अमीअधार जी बेहद सुलझे हुए इंसान थे। छोटों के प्रति प्रेम और बड़ों के लिए सम्मान उनके सामान्य आचरण का हिस्सा था।लगभग बीस साल पहले मथुरा मे जब उनसे मुलाकात हुई थी तब वह दैनिक जागरण के ब्यूरो चीफ थे। तीस वर्ष का यह नौजवान पत्रकारिता के ऊचें आदर्शों को समर्पित अत्यन्त परिश्रमी और अपने कार्य के प्रति समर्पित था। तब से उन्होंने लम्बा सफर तय किया और पत्रकारिता के क्षेत्र में अपने को स्थापित किया।
बहुत ही जिंदादिल और आध्यात्मिक बहुआयामी व्यक्तित्व के धनी, सात्विक जीवन जीने वाले अमी आधार निडर जी राधा स्वामी पंथ के अनुयाई थे।आजकल आगरा कालेज में पत्रकारिता विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर कार्यरत थे।साथ ही इतिहास के पुनर्लेखन के लिए कार्यरत थे।उनके योगदान को देखते हुए उन्हें लखनऊ के हिन्दी संस्थान से लेकर कोटा की भारतेंदु अकादमी तक अनेक पुरस्कारों से नवाजा गया।ताज महोत्सव का उद्घाटन समारोह उनके गीत से हुआ। हिचकी साहित्यिक कंटेंट से भरपूर उनकी पत्रिका “हिचकी” पांचवें वर्ष मे प्रवेश कर गई थी।
आगरा दैनिक जागरण के पत्रकार पंकज कुलश्रेष्ठ की कोरोना से असमय निधन पर उन्होंने जोरदार आवाज उठाई। यकीन नहीं होता है कि यह उदीयमान पत्रकार,साहित्यकार व इतिहासकार हमारा साथ छोड़कर चला गया। उम्र में तो काफी छोटे थे पर सच्चे दोस्त थे।कई बार हमारे विचार नहीं मिलते थे पर दिल हमेशा कनेक्ट रहे।
श्रद्धांजलि निडर भाई,ईश्वर परिजनों सहित हम सबको इस दुख को सहन करने की क्षमता दे।
राकेश श्रीवास्तव
लखनऊ






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