आज सृजन की मासिक ईकाव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में स्वागत भाषण करते हुए श्रीमती सीमा वर्मा ने उपस्थित सभी का स्वागत किया और कहा पिछले 18 वर्षों से कार्यरत सृजन पुनः अपनी सक्रियता बनाए रखने के प्रयास में दूसरी ई काव्य गोष्ठी का आयोजन कर रहा है। स्थितियां, परिस्थितियां बदलें लेकिन हमारा सृजन भले ही धीमा हो लेकिन रुकना नहीं चाहिए और अच्छी संख्या में इस कवि गोष्ठी में सदस्यों का भाग लेना सृजन के लिए हर्ष का विषय है। ईकाव्यगोष्ठी का संचालन सृजन के सचिव डॉ टी महादेव राव ने किया ।
हिंदी पखवाड़ा के संदर्भ को लेकर जय प्रकाश झा ने हिंदी भाषा पर कविता सुनाई, जिसमें हिंदी भाषा की विशेषताएं और भारत भर में उसकी प्रसिद्धि का विवरण था। अपनी दूसरी कविता में प्रेरणा देते हुए उन्होंने आवाज दी “तूफानों से लड़ने का हौसला रखो”। इसी क्रम को आगे बढ़ाते हुए मीना गुप्ता ने हिंदी उर्दू और तेलुगु को बहनों की संज्ञा देते हुए बोली की मिठास को अपनी कविता में रेखांकित किया। “पेपरवेट” को बिम्ब बनाकर मानव जीवन के विभिन्न पहलुओं से उसे जोड़ा और “आज के हालात” कविता में बदलती परिस्थितियों को बयान किया। बी एस मूर्ति ने सर्व रोग निवारण करने वाली “तारीफ” पर कविता पढ़ी। हास्य कविता “चेला होनहार चेला” पर लोगों को गुदगुदाया।

“बम में कहां है दम” हास्य कविता के साथ प्रस्तुत एस वी आर नायडू। किरण सिंह ने वर्तमान की वस्तुस्थितियों पर अपनी “रचना” सुनाई। हिंदी दिवस पर आधारित अपनी सृजनात्मकता का कविता के माध्यम से परिचय कराया भारती शर्मा ने। उन्होंने तीन “मुक्तक” और “गजल” सुनाईं जिसमें मानवीय संवेदनाओं को और परिस्थितियों को बखूबी उकेरा गया।
निशिकांत अग्रवाल ने मुक्तक से शुरू करके अपनी रचना “सरकारी नौकरी करना भी कहां आसान है दोस्तों” जिसमें सरकारी कर्मियों की व्यथा गाथा थी, सुनाई जिसे सभी ने पसंद किया। नीरव कुमार वर्मा ने जीवन की विसंगतियों को और विरोधाभासों को रेखांकित करती अपनी कविता सुनाई “कहां जा रहा हूं मैं”। भटकाती स्थितियाँ, असमंजस देते परिवेश पर अच्छी कविता थी। राम प्रसाद यादव ने बिंबों और प्रतीकों से भरी अपनी रचना सुनाई शीर्षक था “सौदा” जिसमें हालातों पर तीखी नजर और कटाक्ष था ।
डॉ टी महादेवराव ने “प्रतिक्रिया” और “पत्थरों की बारिश” शीर्षक दो कविताएं सुनाई सुनाई, जिसमें वर्तमान में पाषाण होते मानव प्रवृत्ति को भलीभांति दर्शाया गया। रेणुका सोनकर ने ढाई अक्षर कविता में सारे मानव जीवन से जुड़ी अनुभूतियों और भावनाओं को प्रकट किया। कार्यक्रम में डॉ ज़ी वी वी सत्यनारायण, सुदिप्ता बक्शी, रानी और केंद्रीय विद्यालय के शिक्षक व शिक्षिकाएं भी शामिल रहे।
अंत में सृजन के अध्यक्ष नीरव कुमार वर्मा ने उपस्थित सभी का आभार माना और सभी को रचना सृजन के लिए प्रेरित किया. उन्होंने कहा इस तरह मिलजुल कर भले ही आभासी मंच हो हम साहित्य सृजन की ओर अग्रसर हो सभी हमारी प्रतिभा का और सर्जना का सही अर्थ सामने आएगा। इस कार्यक्रम का संयोजन निशिकांत अग्रवाल और तकनीकी सहयोग सदानंद तिवारी का था।






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