गीत
साहस मन मे नित भरते हैं
आगे निरंतर पग बढ़ते हैं
ईश्वर निश्चित अवसर देंगे
जीवन को निर्मल रखते हैं
जोगी सा जीवन जीते हैं
अमृत सुख दुख का पीते हैं
दीनों के आँचल सीते हैं
सच के पथ पर ही चलते हैं
जीवन को निर्मल रखते हैं
बहती नदिया में हैं छम छम
लहरों में संगीत की सरगम
लहराएगा विजय का परचम
दुर्गम लक्ष्य भी पा सकते हैं
जीवन को निर्मल रखते हैं
राह कटीली रोज़ चलेंगे
ऊंचे पर्वत हैं न डरेंगे
दृढ़ सदा विश्वास रखेंगे
मिलकर ऐसा प्रण करते हैं
जीवन को निर्मल रखते हैं
विद्वानों का सत्य सुना है
सच्चाई का मार्ग चुना है
श्रेष्टता का स्वप्न बुना है
आत्मा में आनंद भरते हैं
जीवन को निर्मल रखते हैं
जीवन के अब पाठ पढ़ेंगे
अध्ययन वेदों का भी करेंगे
मानवता का मार्ग चलेंगे
इतिहास अनूठा अब रचते हैं
जीवन को निर्मल रखते हैं
केटी दादलाणी






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