
सन् 2003 में नासा के वैज्ञानिकों ने यह अनुमान लगा लिया था कि ब्रह्मांड में मौजूद सभी सौर-मंडल और ग्रह-नक्षत्रों से ज्यादा शक्तिशाली ब्लैक होल है । जिसमें सभी को अपने अंदर खींच कर अतल गहराई में ले जा कर विलुप्त कर देने की असीम शक्ति है। उस ब्लैक होल से वैज्ञानिकों ने पहली बार देर तक ” ॐ ” की चतुर्दिक गूंजती हुई हृदय को दहलाने वाली ध्वनि सुनी। संभवतः कभी अंतरिक्ष में सुरक्षित उन सारी आवाजों को मनुष्य को सुनाया जा सके जो सृष्टि के आरंभ से पिछले तीनों युगों में व्यक्ति या अन्य चीजों (यथा बिजली की चमक, बादलों की गर्जना, बाढ़वाग्नि, प्रलय की आवाज आदि से निकल कर अंतरिक्ष में सुरक्षित हो गयी है।
सदियों पहले आइंस्टीन, गैलेलियो व अन्य वैज्ञानिकों ने भी भविष्यवाणी की थी कि पृथ्वी से निकली हुई समस्त आवाजें अंतरिक्ष में मौजूद हैं । जिन्हें भविष्य में वर्तमान जीवित प्राणियों को सुनाया जा सकेगा ।
चंद्रा …..सैटेलाइट ने ब्लैक होल से निकल रही ध्वनि ” ॐ ” की तीव्रता को कम कर मनुष्य के कानों से सुनने कम किया । फिर दूरदर्शन से प्रकाश-छड़ी के रूप में दांये से बांये, बांये से दांये (सरकस और मीना बाजार की तरह) ब्लैक होल से निकल रही “ॐ ” ध्वनि को दस मिनट से ज्यादा समय तक दिखाते हुए सुनाया। अमेरिकी वैज्ञानिकों और यहां के नासा के अनुसार वह ॐ ही संपूर्ण ब्रह्म है, समस्त ध्वनियों का मूल भी। यह विश्वास व्यक्त किया गया कि कालांतर मैं इसी ब्लैक होल से सृष्टि के आरंभ से अब तक की विलोपित आवाजों को निकाला जा सकेगा । तब न सिर्फ वैदिक काल से सतयुग, त्रेता,द्वापर और कलियुग के मृत लोगों की भी आवाजें सुनी जा सकेंगी, अपितु परिवार, समाज, शहर और देश-विदेश की सच्चाई जानने के लिए कोर्ट या गवाह की जरुरत नहीं पड़ेगी। पिछले युगों के पात्रों की आवाज यह भी सिद्ध कर देगी कि राजा हरिश्चंद्र और उनके पूर्वज, सनत, सनकादि राजा सगर के 60,000 पुत्र हुए थे या नहीं! रामायण काल और महाभारत काल धरती पर किस रूप में आया था । ब्लैक होल को नहीं समझने वालों को बताया जा सकता है कि उफनती हुई नदी एवं समुद्रों में बनने वाले भंवर का असीम अनंत भयावह रूप अंतरिक्ष में सर्वशक्तिमान है। जो समस्त सौर मंडल को निगल सकता है । जिससे ” ब्रह्मवाणी ” ॐ निकली वही तो ब्रह्म यानी परमात्मा का सूक्ष्म या अगोचर रूप है।







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