5 नवम्बर को कृषि कानूनों के खिलाफ और वन अधिकार पट्टा के लिए चक्काजाम और पुतला दहन करेंगे किसान

कोरबा । मोदी सरकार द्वारा बनाए गए तीन कृषि विरोधी कानूनों के खिलाफ राष्ट्रव्यापी आन्दोलन के तहत और छत्तीसगढ़ सरकार से वन अधिकार पट्टा देने कि मांग को लेकर जिले में छत्तीसगढ़ किसान सभा और छत्तीसगढ़ बचाओ आन्दोलन द्वारा पाली ब्लॉक के रैनपुर में दीपका पाली रोड पर 11 बजे चक्काजाम और कोरबा,पाली,कटघोरा ब्लॉक के अनेकों गांव में किसान सभा द्वारा मोदी सरकार का पुतला दहन किया जायेगा।
छत्तीसगढ़ किसान सभा और छत्तीसगढ़ बचाओ आंदोलन की संयुक्त बैठक हुई जिसमें प्रमुख रूप से जवाहर सिंह कंवर, दीपक साहू,प्रशांत झा,रामायण कंवर, मुखराम,वेदप्रकाश, पुरषोत्तम ,संजय उपस्थित थे किसान नेता जवाहर सिंह कंवर और दीपक साहू ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि केंद्र सरकार द्वारा बनाए गए तीनो कृषि कानून, किसानों पर आजादी के बाद सबसे बड़ा हमला है। स्वामीनाथन आयोग की सिफ़ारिशों के अनुसार सी-2 लागत का डेढ़ गुना समर्थन मूल्य देने का वादा करके सत्ता में आई मोदी सरकार अब न्यूनतम समर्थन मूल्य की प्रणाली को ही ख़त्म करने जा रही हैl उसने अडानी और अम्बानी जैसे बड़े कार्पोरेटों को निजी मंडियों की स्थापना की छूट दे दी है, जिससे वह किसानों की फसल को अपने मनमाफ़िक कीमत पर खरीदकर उसे लूट सके और बाद में इसी अनाज को दबाकर और बाजार में कृत्रिम संकट पैदा करके उपभोक्ता से भी अधिकतम मुनाफा कमा सके।
किसान संगठनों का मानना है कि ये तीनों कानून मिलकर देश की सार्वजनिक वितरण प्रणाली को भी तहस-नहस कर देंगे, जिससे किसानों की बदहाली के साथ गरीब, भूमिहीन, शहरी मजदूरों और मध्यमवर्गीय परिवारों के सामने भुखमरी के हालात पैदा हो जाएंगे, क्योंकि देश में अनाज भंडार पर नियंत्रण कार्पोरेटों का होगा और इससे खाद्यान्न सुरक्षा खत्म हो जाएगी। उनका आरोप है कि ठेका खेती देश के किसानों को कार्पोरेटों का गुलाम बना देगी।
बैठक में माकपा नेता प्रशांत झा ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा इन तीनों कानूनों को निष्प्रभावी करने का वादा किया गया था, परन्तु सिर्फ निजी मंडियों पर सरकारी नियंत्रण हेतु मंडी कानून में संशोधन में किए गए और समर्थन मूल्य, कांट्रेक्ट फार्मिंग और आवश्यक वस्तु कानून के बारे में सोची-समझी चुप्पी साध ली गई है। मंडी संशोधन कानून किसी भी रूप में किसानों के हितों की रक्षा नहीं करता राज्य सरकार को इन सभी मुद्दों पर अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए और एक सर्वसमावेशी कानून बनाना चाहिए।
माकपा नेता ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार वन भूमि में कबीजों को वन अधिकार पट्टा देने का केवल दिखावा कर रही है छत्तीसगढ़ सरकार से मांग करते हैं कि वनभूमि में कबीजों को तत्काल वन अधिकार का पट्टा दिया जाए

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