*राटा पूजा के साथ श्री रामनवमी महोत्सव का शुभारंभ, यजमान वी. रामा राव ने सपत्नीक की पूजा-अर्चना*

बिलासपुर/यू मुरली राव। बिलासपुर आंध्र समाज द्वारा प्रतिवर्ष रेलवे कंस्ट्रक्शन कॉलोनी स्थित दुर्गा पंडाल में आयोजित होने वाले भव्य श्री श्री रामनवमी महोत्सव का शुभारंभ इस वर्ष भी पारंपरिक विधि-विधान के साथ हो गया। विगत 68 वर्षों से लगातार आयोजित हो रहे इस तीन दिवसीय (विस्तारित कार्यक्रम 26 से 30 मार्च) महोत्सव की शुरुआत गुरुवार, चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को दक्षिण भारतीय परंपरा अनुसार राटा (कास्ट) पूजा के साथ की गई। आयोजन स्थल पर विधिवत पूजा-अर्चना संपन्न कराते हुए भाजपा नेता वी. रामा राव ने अपनी धर्मपत्नी वी. हेमलता के साथ प्रमुख यजमान के रूप में अनुष्ठान सम्पन्न किया। वैदिक मंत्रोच्चार और परंपरागत रीति-रिवाजों के बीच सम्पन्न इस पूजा ने पूरे आयोजन की आध्यात्मिक शुरुआत की। आयोजन समिति के अध्यक्ष टी. श्रीनिवास एवं सचिव ए. सांई गोपाल ने जानकारी देते हुए बताया कि बिलासपुर में वर्ष 1959 से इस महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है और वर्तमान में आयोजनकर्ताओं की तीसरी पीढ़ी इसे और अधिक भव्यता के साथ आगे बढ़ा रही है। उन्होंने बताया कि जहां देशभर में रामनवमी पर भगवान श्रीराम का जन्मोत्सव मनाया जाता है, वहीं यहां दक्षिण भारतीय परंपरा के अनुसार “श्री सीताराम कल्याणम” यानी भगवान श्रीराम और माता सीता का विवाह भी धूमधाम से संपन्न कराया जाता है। महोत्सव के तहत 26 मार्च को प्रातः सुदर्शन होम के साथ मुख्य कार्यक्रमों का आरंभ होगा। 27 मार्च को नित्य पूजा में गंटी सांई राम एवं जी. सांई श्री यजमान की भूमिका निभाएंगे। इसी दिन सीताराम कल्याणम के अंतर्गत के. वासुदेव राव एवं दीप्ति तथा एन. राधा कृष्णा एवं लक्ष्मी सरस्वती द्वारा विवाह अनुष्ठान संपन्न कराया जाएगा।

28 मार्च को कुमकुम पूजा, 29 मार्च को रुद्राभिषेक तथा 30 मार्च को सत्यनारायण कथा के साथ महोत्सव का समापन होगा। प्रतिदिन संध्या आरती एवं प्रसाद वितरण का आयोजन भी किया जाएगा। परंपरा अनुसार अंतिम दिन 30 मार्च को भव्य शोभायात्रा निकाली जाएगी, जिसमें सांस्कृतिक कार्यक्रमों की भी आकर्षक प्रस्तुतियां होंगी। आयोजन के दौरान पारंपरिक रूप से फूलों की भव्य सजावट की जाएगी और विविध प्रकार के दक्षिण भारतीय व्यंजन भगवान को अर्पित कर प्रसाद के रूप में वितरित किए जाएंगे। समिति ने बताया कि इस महोत्सव के लिए विशेष रूप से आंध्र प्रदेश के राजामुंदरी (राजमेंडरी) से पुजारियों का दल प्रतिवर्ष बिलासपुर आता है, जो सभी धार्मिक अनुष्ठानों को विधिवत संपन्न कराता है। साथ ही आंध्र प्रदेश से विशेष रसोइयों एवं पारंपरिक नादस्वरम वाद्य यंत्र वादकों को भी आमंत्रित किया जाता है, जिससे आयोजन की सांस्कृतिक गरिमा और बढ़ जाती है। इस अवसर पर प्रमुख यजमान वी. रामा राव ने कहा कि बिलासपुर में दक्षिण भारतीय समुदाय के प्रमुख धार्मिक आयोजनों में यह महोत्सव विशेष स्थान रखता है, जिसमें दूर-दूर से आंध्र समाज के लोग भाग लेने आते हैं। उन्होंने सभी को तेलुगु नववर्ष “उगादि” की शुभकामनाएं देते हुए सभी के सुख, समृद्धि और उज्ज्वल भविष्य की कामना की। साथ ही उन्होंने कहा कि हर वर्ष आयोजन को और अधिक भव्य बनाने का प्रयास किया जाता है तथा यह भी प्रयास रहता है कि आंध्र समाज के साथ-साथ अन्य समाज के लोग भी इसमें सहभागिता करें। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस वर्ष आयोजित होने वाला श्री रामनवमी महोत्सव अपने धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक आयामों के कारण सभी के लिए यादगार सिद्ध होगा।राटा पूजा के साथ श्री रामनवमी महोत्सव का शुभारंभ, यजमान वी. रामा राव ने सपत्नीक की पूजा-अर्चना

बिलासपुर। बिलासपुर आंध्र समाज द्वारा प्रतिवर्ष रेलवे कंस्ट्रक्शन कॉलोनी स्थित दुर्गा पंडाल में आयोजित होने वाले भव्य श्री श्री रामनवमी महोत्सव का शुभारंभ इस वर्ष भी पारंपरिक विधि-विधान के साथ हो गया। विगत 68 वर्षों से लगातार आयोजित हो रहे इस तीन दिवसीय (विस्तारित कार्यक्रम 26 से 30 मार्च) महोत्सव की शुरुआत गुरुवार, चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को दक्षिण भारतीय परंपरा अनुसार राटा (कास्ट) पूजा के साथ की गई।
आयोजन स्थल पर विधिवत पूजा-अर्चना संपन्न कराते हुए भाजपा नेता वी. रामा राव ने अपनी धर्मपत्नी वी. हेमलता के साथ प्रमुख यजमान के रूप में अनुष्ठान सम्पन्न किया। वैदिक मंत्रोच्चार और परंपरागत रीति-रिवाजों के बीच सम्पन्न इस पूजा ने पूरे आयोजन की आध्यात्मिक शुरुआत की।
आयोजन समिति के अध्यक्ष टी. श्रीनिवास एवं सचिव ए. सांई गोपाल ने जानकारी देते हुए बताया कि बिलासपुर में वर्ष 1959 से इस महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है और वर्तमान में आयोजनकर्ताओं की तीसरी पीढ़ी इसे और अधिक भव्यता के साथ आगे बढ़ा रही है। उन्होंने बताया कि जहां देशभर में रामनवमी पर भगवान श्रीराम का जन्मोत्सव मनाया जाता है, वहीं यहां दक्षिण भारतीय परंपरा के अनुसार “श्री सीताराम कल्याणम” यानी भगवान श्रीराम और माता सीता का विवाह भी धूमधाम से संपन्न कराया जाता है।


महोत्सव के तहत 26 मार्च को प्रातः सुदर्शन होम के साथ मुख्य कार्यक्रमों का आरंभ होगा। 27 मार्च को नित्य पूजा में गंटी सांई राम एवं जी. सांई श्री यजमान की भूमिका निभाएंगे। इसी दिन सीताराम कल्याणम के अंतर्गत के. वासुदेव राव एवं दीप्ति तथा एन. राधा कृष्णा एवं लक्ष्मी सरस्वती द्वारा विवाह अनुष्ठान संपन्न कराया जाएगा। 28 मार्च को कुमकुम पूजा, 29 मार्च को रुद्राभिषेक तथा 30 मार्च को सत्यनारायण कथा के साथ महोत्सव का समापन होगा। प्रतिदिन संध्या आरती एवं प्रसाद वितरण का आयोजन भी किया जाएगा।
परंपरा अनुसार अंतिम दिन 30 मार्च को भव्य शोभायात्रा निकाली जाएगी, जिसमें सांस्कृतिक कार्यक्रमों की भी आकर्षक प्रस्तुतियां होंगी। आयोजन के दौरान पारंपरिक रूप से फूलों की भव्य सजावट की जाएगी और विविध प्रकार के दक्षिण भारतीय व्यंजन भगवान को अर्पित कर प्रसाद के रूप में वितरित किए जाएंगे।
समिति ने बताया कि इस महोत्सव के लिए विशेष रूप से आंध्र प्रदेश के राजामुंदरी (राजमेंडरी) से पुजारियों का दल प्रतिवर्ष बिलासपुर आता है, जो सभी धार्मिक अनुष्ठानों को विधिवत संपन्न कराता है। साथ ही आंध्र प्रदेश से विशेष रसोइयों एवं पारंपरिक नादस्वरम वाद्य यंत्र वादकों को भी आमंत्रित किया जाता है, जिससे आयोजन की सांस्कृतिक गरिमा और बढ़ जाती है।

इस अवसर पर प्रमुख यजमान वी. रामा राव ने कहा कि बिलासपुर में दक्षिण भारतीय समुदाय के प्रमुख धार्मिक आयोजनों में यह महोत्सव विशेष स्थान रखता है, जिसमें दूर-दूर से आंध्र समाज के लोग भाग लेने आते हैं। उन्होंने सभी को तेलुगु नववर्ष “उगादि” की शुभकामनाएं देते हुए सभी के सुख, समृद्धि और उज्ज्वल भविष्य की कामना की। साथ ही उन्होंने कहा कि हर वर्ष आयोजन को और अधिक भव्य बनाने का प्रयास किया जाता है तथा यह भी प्रयास रहता है कि आंध्र समाज के साथ-साथ अन्य समाज के लोग भी इसमें सहभागिता करें।
उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस वर्ष आयोजित होने वाला श्री रामनवमी महोत्सव अपने धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक आयामों के कारण सभी के लिए यादगार सिद्ध होगा।

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