कविता- (वृक्ष)
मुझे मत काटो,
मैं बोल नहीं सकता।
मुझे मत बाँटो,
मैं बैल नहीं सकता।
मुझे दर्द होता है,
मैं बोल नहीं सकता।
घुटन सा लगता है,
मैं बोल नहीं सकता।
चुभन सा लगता है,
मैं बोल नहीं सकता।
तड़प के मर रहा हूँ,
मैं बोल नहीं सकता।
रगो में खून है,
मैं बोल नहीं सकता।
तन में धूल है,
मैं बोल नहीं सकता।
कहूँ तो कैसे कहूँ ?
मैं बोल नहीं सकता।
भूख लगती है,
मैं बोल नहीं सकता।
धूप लगती है,
मैं बोल नहीं सकता।
जिऊँ तो कैसे जिऊँ?
मैं बोल नहीं सकता।
शनि प्रधान_✍???








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