
तिल्दा/ नेवरा/ मामला तिल्दा नेवरा थाना क्षेत्र का है जहां प्रार्थी ने दिनांक 03 .08 .2021 को तिल्दा नेवरा थाना में आकर रिपोर्ट दर्ज कराया कि इनके नाबालिक पुत्री जो रात्रि 3 बजे से बिना बताये कही चली गई है और अभी तक वापस नहीं आई है की रिपोर्ट पर तत्काल धारा 363 भादवि के तहत अपराध दर्ज किया गया।
मामला गंभीर एवं नाबालिक बालिका से सम्बंधित होने पर घटना की जानकारी तुरंत जिले के आला अधिकारियों को दी गई जिसके बाद पुलिस महानिदेशक छ०ग० तथा पुलिस महानिरीक्षक रायपुर रेंज रायपुर के द्वारा महिला / बच्चों से संबंधित अपराधों पर त्वरित कार्यवाही करने के संबंध में जारी दिशा-निर्देश के परिपालन में जिला अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ग्रामीण तारकेश्वर पटेल, उप पुलिस अधीक्षक मुख्यालय रायपुर से मार्ग दर्शन लेकर तिल्दा नेवरा के थाना प्रभारी शरद चंद्रा ने टीम का गठन कर पता तलाश में जुट गए मुखबीर की सुचना पर खरोरा में नाबालिक बालिका को मोतीचंद उर्फ़ मोचन चौहान पिता संचित चौहान उम्र 26 साल मिशन कालोनी तिल्दा के पास से बरामद किया गया।
पूछताछ में नाबालिक बालिका ने बताया की करीब 05-06 माह पहले मोतीचंद उर्फ मोचन चौहान के द्वारा पसंद करने ,शादी कर पत्नी बनाकर रखने की बात बोलकर रात्रि के समय घर के बाहर से बहला-फुसलाकर अपनी स्कूटी में बैठाकर जोता रोड नहर नाला तरफ ले जाकर जबरन इच्छा के विरुद्ध शारिरिक संबंध बनाया और यह बात किसी को बताने पर जान से मारने की धमकी दी तथा कई बार अकेला पाकर शारिरिक संबंध बनाए जिस कारण गर्भवती हो गई तथा दिनांक 02/08/2021 को रात करीब 12:30 बजे मोचन चौहान ग्राम खरोरा ले जाकर किसी परिचित के कमरा मे लेकर रख और इस दौरान भी शारिरिक संबंध बनाया जाना बताया नाबालिक के बयान के आधार पर आरोपी मोतीचंद उर्फ मोचन चौहान पिता संचित चौहान उम्र-26 साल के विरुद्ध अपराध धारा 366,376,506 भादवि एवं 04,06 पॉक्सो एक्ट का घटित करना पाये जाने से उपरोक्त धाराएं प्रकरण में जोड़ी जाकर आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर माननीय न्यायालय पेश किया गया है जहा से उसे जेल भेज दिया गया ।
उपरोक्त कार्यवाही उमनि/वपुअ पुलिस अधीक्षक महोदय रायपुर के निर्देशानुसार अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक महोदय ग्रामीण एवं उप पुलिस अधीक्षक मुख्यालय रायपुर के विशेष मार्ग दर्शन में निरीक्षक शरद चन्द्रा, उपनिरीक्षक रनेश सेठिया ,प्रधान आरक्षक हिरेन्द्र वर्मा के द्वारा अपराध कायमी के महज 12 घंटे के भीतर आरोपी के कब्जे से अपहृत बालिका को बरामद करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई है।







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