
कोरबा/ आज से शारदीय नवरात्रि प्रारंभ हो गई। सुबह शुभ मुहूर्त में विद्वान पंडितों एवं आचार्यों के मंत्रोच्चार के साथ नवदुर्गा का प्रथम रूप मां शैल पुत्री की पूजा अर्चना और विशेष आरती के बाद मां सर्वमंगला देवी मंदिर दुरपा कोरबा परिसर में स्थित कलश कक्षों में 11 हजार ज्योति कलशों को प्रज्ज्वलित किया गया। मां सर्वमंगला देवी मंदिर दुरपा के प्रबंधक नन्हा महराज (नमन पांडेय) ने कहा कि ज्योति कलश से परिसर में जहां सत्व का प्रकाश फैलता है और इस प्रकाश पूंज से मनोकामना ज्योति कलश प्रज्ज्वलित कराने वाले श्रद्धालुओं के परिवार में अपार सुख का संचार होता है,वहीं घर का कलेष दूर होता है और ऐश्वर्य, बुद्धि एवं बेहतर स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है।
नन्हा महराज ने बताया कि आज आश्विन शुक्ल पक्ष प्रतिपदा को सुबह 7 बजे नौ दुर्गा के प्रथम रूप मां शैल पुत्री की विशेष आरती की गई और शाम को भी विशेष आरती होगी। विशेष आरती के बाद दोपहर को मां को उनका प्रिय भोग गाय का दूध और फल अर्पित किया गया। श्री पांडेय ने बताया कि मां शैल पुत्री की विधि विधान से पूजा करने से संतान की प्राप्ति होती है और संतान संस्कारवान, परिवार को जोडक़र रखने वाला और समाज में आदर्श स्थापित करने वाला बनता है।
11 हजार ज्योति कलश प्रज्ज्वलित
नन्हा महराज ने बताया कि मां शैल पुत्री की पूजा अर्चना के बाद घट स्थापना शुभ मुहूर्त में की गई और उसके बाद मंत्रोच्चार के साथ 11 हजार ज्योति कलश विद्वान पंडितों द्वारा प्रज्ज्वलित किया गया। दीप प्रज्ज्वलन के बाद मां सर्वमंगला मंदिर परिसर में एक अजीब सी ऊर्जा का संचार हुआ, जो कलेष मिटाने वाला और सबके मन को उज्ज्वल बनाने वाला है। 11 हजार श्रद्धालुओं की तरफ से 11 हजार ज्योति कलश मां के सम्मान में समर्पित किया गया।
माता के दरबार में मत्था टेकने से ही जीवन में सुख शांति आती है, साथ ही जो भक्त ज्योति कलश जलाकर मनोकामना करते हैं, उनकी आकांक्षाएं पूर्ण होती हैं और घर में ऐश्वर्य और समृद्धि का वास होता है।
नन्हा महराज ने बताया कि नौ दिन तक मां के नौ रूपों की पूजा की जाएगी। आज मां शैल पुत्री की पूजा अर्चना के साथ नवरात्र प्रारंभ हो गया। प्रतिदिन रात्रि 11 बजे मां शैल पुत्री का महा श्रृंगार किया जाएगा और पूजा अर्चना की जाएगी। महा श्रृंगार का दृश्य अद्भूत और मनोरम होता है। मां के इस दृश्य से प्रकृति भी मां के श्रृंगार के लिए आतुर दिखाई देती है। मां शैल पुत्री की पूजा अर्चना से संतान की प्राप्ति और संतान संस्कारवान बनता है। कल 04 अक्टूबर आश्विन शुक्ल द्वितीया को मां दुर्गा के द्वितीय रूप मां ब्रम्हचारिणी देवी की पूजा अर्चना की जाएगी। ब्रम्हचारिणी देवी को भोग में मिश्री और फल अतिप्रिय है, इसलिए उन्हें कल मिश्री और फल का भोग लगाया जाएगा। मां ब्रम्हचारिणी देवी की पूजा से जीवन में सुख शांति आती है और मृत्यु अकाल नहीं होती और मोक्ष की प्राप्ति होती है।









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