
बहुत रह लिए शांत,
बहुत दिखा लिए सम्भ्रान्त,
नारी हो कटारी बनो तुम,
जैसे बदनाम हो जुबान चलाने में,
थोड़ा बदनाम करो खुद को हथियार चलाने में,
एक जेब मे फ़ोन रखती हो तुम,
वैसे ही एक जब सिलवाओ जिसमें रखो तेज कटार तुम,
घर में जिद करती हो नई चीजें दिलवाने के लिए,
वैसे ही एक जिद करो कराटे सीखने के लिए,
एक आरंभ से बहुत कुछ बदल जायेगा,
हर गली मोहल्ला इज्जत दारों का नजर आएगा,
आत्म निर्भर का दौर चला है,
तुम भी खुद को आत्म निर्भर बनाओ,
लक्ष्मी तो बेटियां हैं, लेकिन अब दुर्गा का रूप धरो,
जो देखे गंदी नजरों से,
उसका महिसासुर समझ संघार करो,
बहुत शांति मिलेगी जब खुद की न्यायाधीश बनोगी,
नारीत्व तुमको आशीर्वाद देगी,
हर बेटी को तब बेटी होने पर गर्व होगा,
जब दुनियाँ वास्तव में नारियों का इज्जत करेगी|
चंद्रप्रभा, गिरिडीह (झारखंड)






Comments are closed.