ए बी सी डी छोड़ के भैया क ख ग तुम पढ़ लेना ,
अँग्रेज़ी की छोड़ के नैया हिन्दी में पग धर लेना ।

कोट पैंट टाई बुसर्ट से हमको कोई गु़रेज़ नहीं ,
धोती कुर्ता बाँध लंगोट संग नाता भी तुम कर लेना ़।
माना बेहतर है तकनीकि विदेशी हिंदुस्तान से ,
मगर छुपी हैं जड़ें यहाँ तुम इतना आज समझ लेना ।
थाउजेंट मिलियन बिलियन डालर पूरे ना हो पाएंगे ,
अगर मिले न शून्य हमारा फिर चाहे जो कर लेना ।
मिल जाएंगे सकल विश्व में हिन्दी कहने वाले ,
अपने ही घर हुई बेगानी हिन्दी के संग हो लेना ।
दुनियाँ भर के शब्द समाहित हिन्दी का है आँचल ,
ऐसी समृद्ध भाषा से नित शब्द नए तुम गढ़ लेना ।
जननी कहते भाषा जिसे हम उस हिन्दी के सेवक ,
जन जन में इसके प्रसार का पक्का प्रण तुम कर लेना ।
घनश्याम तिवारी
कोरबा ( छ. ग.)







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